शुद्ध पेय जल की सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को पुराने कूप से जल भरने की मजबूरी
पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:- ठंड के मौसम में भी पाकुड़िया प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेय जल की सुविधा उपलब्ध नहीं रहने के कारण लोगों, विशेषकर महिलाओं, को सदियों पूर्व निर्मित ध्वस्त कूप से पेय जल भरने की विवशता देखी गई। परन्तु ठंडक का सीजन बीतने और गर्मी पड़ने से कड़ी धूप में पेय जल की भीषण कठिनाइयों की आशंकाएं ग्रामीणों में बढ़ने की सूचना मिल रही है।
बताया जाता है कि पाकुड़िया प्रखण्ड के पलियादह पंचायत के सोगले टोला में आर.ई.ओ. सड़क के निकट पेय जल भर रही लड़की और टोलेवासियों से पेय जल सुविधा के संदर्भ में पूछने पर ग्रामीणों ने बताया कि इस टोले में एक नलकूप है लेकिन अधिक पानी नहीं निकलता है। इसलिए हम लोग पुराने कूप से पेय जल भरते हैं। लोगों ने कहा कि धूप और गर्मी के दिनों में नलकूप से पानी निकलना बंद होने से कठिनाई और बढ़ेगी। उन दिनों कूप में पानी भी कम होगा।
वहीं टोले की महिलाओं ने बताया कि यदि इस नलकूप की पूरी तरह मरम्मत करा दी जाए और एक नया नलकूप लगा दिया जाए तो इस टोले के लोगों को पेय जल की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।एक आकलन के मुताबिक बताया जा रहा है कि पाकुड़िया प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे सदियों पूर्व निर्मित ध्वस्त कूप हैं जिनमें अब भी उपयोगी जल उपलब्ध है। यदि पंचायतों से उन सभी ध्वस्त कूपों का पुनर्निर्माण करा दिया जाए तो पेय जल की सुविधा बेहतर हो सकती है।
कई ग्रामीण क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि पंचायतों में इन दिनों वित्त आयोग तथा मनरेगा आदि के फंड उपलब्ध हैं, पर वित्त आयोग की राशि का बड़े पैमाने पर पक्की नालियों और गार्डवाल के निर्माण में उपयुक्त स्थलों का चयन नहीं होने के कारण सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। विशेषकर पक्की नालियों का निर्माण करते समय स्थलों का चयन ग्रामीणों की राय से होना चाहिए, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है।
बहरहाल, प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर नलकूपों की सही मरम्मत नहीं होने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि बेकार पड़े नलकूपों की मरम्मत जल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से करवा दी जाए तो लोगों का मानना है कि पेय जल की सुविधा में काफी सुधार होगा।

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