ढाई करोड़ की सरकारी जमीन को प्राइवेट के नाम करने पर डीएम का एक्शन,।
कानूनगो का हुआ डिमोशन,बना लेखपाल।
स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।
प्रयागराज के गंगापार के सोरांव तहसील में एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) को सरकारी जमीन की हेरफेर के आरोप में डिमोशन कर लेखपाल बना दिया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपी कानूनगो दूधनाथ को निलंबित भी कर दिया गया है।
कानूनगो दूधनाथ पर फाफामऊ में बंजर और परती भूमि को पैसे लेकर अपने करीबियों के नाम करने का आरोप है। शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई,जिसमें वह दोषी पाए गए।
इस मामले की शिकायत शासन और प्रशासन तक पहुंची थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गई,जिसमें दो नायब तहसीलदार, एक कानूनगो और एक लेखपाल शामिल थे। लगभग चार महीने तक चली जांच में तहसील और जिला अभिलेखागार के सभी दस्तावेज खंगाले गए।
जांच में सामने आया कि कानूनगो ने परती जमीन को तीन लोगों के नाम करने के लिए अभिलेखों में छेड़छाड़ की थी। उन्होंने सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया था। दो दिन पहले यह जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने दोषी कानूनगो को डिमोशन करते हुए लेखपाल बना दिया और उन्हें निलंबित भी कर दिया। इसके अलावा, दूधनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश भी पुलिस को दिए गए हैं। एक अन्य लेखपाल को यह मुकदमा दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया गया है। जांच में पता चला है कि लगभग ढाई करोड़ रुपये की यह जमीन 20 लाख रुपये लेकर निजी लोगों के नाम की गई थी।
सोरांव के एसडीएम ज्ञानेंद्र नाथ ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। कानूनगो दूधनाथ जनवरी 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। तहसील के अभिलेखों में इस जमीन को फिर से परती की श्रेणी में दर्ज करा दिया गया है।
प्रयागराज के गंगापार के सोरांव तहसील में एक राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) को सरकारी जमीन की हेरफेर के आरोप में डिमोशन कर लेखपाल बना दिया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपी कानूनगो दूधनाथ को निलंबित भी कर दिया गया है।
कानूनगो दूधनाथ पर फाफामऊ में बंजर और परती भूमि को पैसे लेकर अपने करीबियों के नाम करने का आरोप है। शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई,जिसमें वह दोषी पाए गए।
इस मामले की शिकायत शासन और प्रशासन तक पहुंची थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गई,जिसमें दो नायब तहसीलदार, एक कानूनगो और एक लेखपाल शामिल थे। लगभग चार महीने तक चली जांच में तहसील और जिला अभिलेखागार के सभी दस्तावेज खंगाले गए।
जांच में सामने आया कि कानूनगो ने परती जमीन को तीन लोगों के नाम करने के लिए अभिलेखों में छेड़छाड़ की थी। उन्होंने सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया था। दो दिन पहले यह जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने दोषी कानूनगो को डिमोशन करते हुए लेखपाल बना दिया और उन्हें निलंबित भी कर दिया। इसके अलावा, दूधनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश भी पुलिस को दिए गए हैं। एक अन्य लेखपाल को यह मुकदमा दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया गया है। जांच में पता चला है कि लगभग ढाई करोड़ रुपये की यह जमीन 20 लाख रुपये लेकर निजी लोगों के नाम की गई थी।
सोरांव के एसडीएम ज्ञानेंद्र नाथ ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। कानूनगो दूधनाथ जनवरी 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। तहसील के अभिलेखों में इस जमीन को फिर से परती की श्रेणी में दर्ज करा दिया गया है।

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