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विकसित भारत की राह बनाता – दूरगामी सोच वाला बजट
आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह बजट एक ठोस संकेत देता है
भारत सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार रविवार, एक फरवरी को देश का बजट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता तात्कालिक लोकलुभावन घोषणाओं से अधिक दीर्घकालीन राष्ट्र निर्माण है। आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह बजट एक ठोस संकेत देता है । इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय घोषणा कैंसर व दुर्लभ बीमारियों में प्रयुक्त जीवनरक्षक दवाओं पर आयात शुल्क समाप्त करना रही, जिससे लाखों मरीजों को सीधी राहत मिलेगी। जबकि विपक्ष हमेशा सरकार पर आम आदमी की उपेक्षा का आरोप लगाता रहा है, यह निर्णय उस आरोप को कमजोर करता है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि भारत को केवल इलाज का केंद्र ही नहीं, बल्कि विश्वसनीय मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
यह सही है कि इस बजट में बड़े उद्योगपतियों या वेतनभोगी वर्ग के लिए कोई आकर्षक घोषणा नहीं की गई, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सरकार ने चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा और कृषि को तकनीक से जोड़कर देश की नींव मजबूत करने का प्रयास किया है। ऐसे बजट का प्रभाव तुरंत नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में दिखाई देगा । स्वाभाविक है कि विपक्ष और कुछ वर्गों को यह बजट पहली नजर में निराशाजनक लग सकता है, क्योंकि यह ‘तुरंत लाभ’ देने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम अप्रत्यक्ष, लेकिन दूरदर्शी निर्णयों के लिए जानी जाती है। यही कारण है कि यह बजट समझने वालों को विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम लगेगा, जबकि समझ से परे रहने वालों के लिए यह महज आंकड़ों का पुलिंदा बनकर रह जाएगा।
अरविंद रावल

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