पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, सवाल – समय पर क्यों नहीं हो रहे चुनाव, देरी क्यों?
याचिका में मांग की गई थी कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए समयबद्ध कार्यक्रम पहले से तय कर रिकॉर्ड पर रखा जाए
ब्यूरो प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा कि समय सीमा के भीतर चुनाव क्यों नहीं करवाए जा रहे हैं? क्या वह संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे या नहीं। यह सुनवाई अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की जनहित याचिका पर हुई। याचिका में मांग की गई थी कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए समयबद्ध कार्यक्रम पहले से तय कर रिकॉर्ड पर रखा जाए।
योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाएगा। इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों पर आरक्षण तय होगा, जिसके बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ कर रही थी। दरअसल, हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया था कि वर्तमान आयोग को स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण का कानूनी अधिकार नहीं है। इसके जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि नया समर्पित आयोग गठित कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। अभी तक OBC आयोग गठन पर कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सरकार के भीतर ही अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। एक तरफ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य चुनाव समय पर होने को मुश्किल बता रहे हैं, वहीं पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर का कहना है कि चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। इन बयानों के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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