Haryana: हरियाणा के राखीगढ़ी को केंद्रीय बजट में बड़ी सौगात, देश के 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में हुआ शामिल

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Haryana News: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट भाषण के दौरान हरियाणा के ऐतिहासिक राखीगढ़ी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। दुनिया की सबसे प्राचीन और विशाल सिंधु-सरस्वती सभ्यता के इस प्रमुख केंद्र को देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ की सूची में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार की इस पहल से राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री ने बताया कि राखीगढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पाथ-वे बनाए जाएंगे, स्थानीय लोगों को गाइड के रूप में नियुक्त किया जाएगा और यहां सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य इस प्राचीन स्थल को आम लोगों और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाना है।

इससे पहले केंद्रीय बजट 2025-26 में भी राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। राखीगढ़ी को देश की सबसे पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल माना जाता है, जिसकी उम्र 6 हजार साल से भी अधिक आंकी गई है।

एक साथ मिले 60 कंकाल, विकसित सभ्यता के प्रमाण

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राखीगढ़ी में अब तक हुई खुदाइयों में हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़े कई अहम साक्ष्य मिले हैं। यहां एक साथ करीब 60 मानव कंकाल मिले हैं। इसके अलावा महिलाओं के आभूषण, प्राचीन लिपि, बर्तन और उन्नत जल निकासी प्रणाली के अवशेष भी सामने आए हैं। ये खोजें बताती हैं कि हजारों साल पहले यहां एक सुव्यवस्थित और विकसित नगरीय सभ्यता मौजूद थी। फिलहाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की दिल्ली टीम यहां लगातार शोध और खुदाई कर रही है।

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ऊंचे टीलों ने खींचा ASI का ध्यान

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राखीगढ़ी में मौजूद ऊंचे टीले, जिनका आकार मिश्र के पिरामिड जैसा प्रतीत होता है, ASI के आकर्षण का केंद्र बने। ये कुल 9 टीले लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। इन्हीं टीलों के कारण ASI ने यहां विस्तृत सर्वे और खुदाई का निर्णय लिया।

तीन चरणों में हुई खुदाई, मिले अहम अवशेष

राखीगढ़ी में पहली खुदाई 1997-98 में ASI द्वारा अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में की गई थी। इस दौरान टीले नंबर 6 और 7 से एक मानव कंकाल मिला, जिससे यहां मानव जीवन के प्रमाण सामने आए। यह कंकाल फिलहाल दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में सुरक्षित है।

दूसरी खुदाई 2013-14 में डेक्कन यूनिवर्सिटी के कुलपति वसंत सिंधे की अगुआई में हुई, जिसकी निगरानी ASI ने की। इस दौरान टीले नंबर 1, 2, 6 और 7 की खुदाई में करीब 60 कंकाल मिले, जिनमें से 8-10 अच्छी अवस्था में थे। एक कंकाल के डीएनए परीक्षण से सभ्यता की उम्र करीब साढ़े पांच हजार साल आंकी गई। आगे की खुदाई में मानव आवास, सूखी नदी, कुएं और बर्तन मिले, जिनकी कार्बन डेटिंग करीब 9 हजार साल पुरानी पाई गई।

तीसरी खुदाई 2023-24 में ASI ने अपने हाथ में ली। ASI के अपर महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल के नेतृत्व में हुई खुदाई में 6 हजार साल पुरानी मकान की दीवारें, कच्ची ईंटें, तांबे के औजार, शंख की चूड़ियां, मनके और मोहरें मिलीं। इसके बाद से यहां लगातार खुदाई का काम जारी है।

नदी के सूखने से हुआ नगर का अंत

ASI के अनुसार राखीगढ़ी हड़प्पाकालीन सभ्यता की अब तक की सबसे बड़ी साइट मानी जाती है, जो करीब 550 हेक्टेयर में फैली हुई है। यहां मौजूद 9 टीलों में से 5 की जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है और टीले नंबर 6 व 7 को संरक्षित करने की तैयारी है।

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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l 

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