कप्तान साहब खाकी को ढाल बना रहे स्पा माफिया, क्या आप तोड़ेंगे यह अपवित्र गठबंधन
बस्ती। बस्ती जिले में मसाज पार्लरों की आड़ में चल रहा जिस्मफरोशी का काला साम्राज्य अब किसी से छिपा नहीं है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस ‘गंदे धंधे’ के सौदागर अब पुलिस (खाकी) को अपनी ढाल बनाकर सरेआम चुनौती दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या बस्ती पुलिस इन माफियाओं के सामने नतमस्तक है या फिर यह मौन किसी “बड़े खेल” का हिस्सा है?
सिस्टम जेब में है’ स्पा माफिया का दुस्साहस
हाल ही में एक स्पा संचालक विक्की चौहान का जो कबूलनामा सामने आया है, उसने खाकी की साख पर गहरा बट्टा लगा दिया है। उसका यह दावा कि “सिस्टम मेरी जेब में है और पुलिस से हमारी पक्की सेटिंग है”, यह बताने के लिए काफी है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरेआम यह स्वीकार करना कि लड़कियां नेपाल से बुलाई जाती हैं और पुलिस का कोई डर नहीं है, सीधे तौर पर जिले की कानून व्यवस्था को अंगूठा दिखाने जैसा है।
DIG के आदेश की अवहेलना: क्या कप्तान के आदेश अब फाइलों में दबेंगे?हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में रेंज के सबसे बड़े अधिकारी, DIG बस्ती परिक्षेत्र ने खुद संज्ञान लिया और सोशल मीडिया के माध्यम से जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कार्रवाई ‘शून्य’ रही। न तो संदिग्ध स्पा सेंटरों पर ताले लटके और न ही विक्की चौहान जैसे गुर्गों पर शिकंजा कसा गया। क्या जिले के थाना स्तर के अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल रहे हैं?
पुलिस की ‘संदिग्ध चुप्पी’ के मायने क्या?
जब ‘जन एक्सप्रेस’ की टीम ने इस मामले की तह तक जाने की कोशिश की और शहर कोतवाल से उनका पक्ष जानना चाहा, तो जवाब गैर-जिम्मेदाराना मिला। जनता पूछ रही है:
आखिर छापेमारी में देरी क्यों की जा रही है?क्या अपराधियों को भागने और साक्ष्य मिटाने का मौका दिया जा रहा है?क्या पुलिस की चुप्पी इस “अपवित्र गठबंधन” पर मुहर नहीं लगाती?
मैदान में उतरिए कप्तान साहब!
बस्ती की जनता अब आपकी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। अगर अब भी पुलिस ने कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो स्पा का यह ‘काला सच’ जांच की फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा। जिले की मर्यादा को तार-तार करने वाले इन सफेदपोश अपराधियों और उनके मददगारों को बेनकाब करना अब आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।मसाज की आड़ में जिस्म का बाजार सजाने वाले ये माफिया तभी तक शेर हैं, जब तक इन्हें खाकी की शह प्राप्त है। कप्तान साहब, क्या आप इस “सेटिंग” के तिलस्म को तोड़कर बस्ती की गलियों से इस गंदगी का सफाया करेंगे?
