कुशीनगर : भैसहां पीपा पुल के बाद पक्का पुल बनेगा या नहीं? सोशल मीडिया पर उठे सवाल
शिव शंभु सिंह
गौरतलब है कि भैसहां पीपा पुल के निर्माण से खड्डा तहसील क्षेत्र के शिवपुर, हरिहरपुर, बाल गोविंद छपरा सहित करीब 50 से 60 हजार की आबादी को आवागमन की अस्थायी सुविधा मिली है। गंडक नारायणी नदी के उस पार बसे इन गांवों के ग्रामीण वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी पार क्षेत्र में आज भी स्वास्थ्य सेवाओं का गंभीर संकट बना हुआ है। किसी महिला या गंभीर मरीज की हालत बिगड़ने पर खड्डा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुरकहां तक पहुंचने के लिए कोई सीधा सड़क मार्ग नहीं है। मजबूरी में मरीजों को नौरंगिया (बिहार) होते हुए लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय कर इलाज के लिए जाना पड़ता है। कई बार गंभीर मरीजों को बगहा, बिहार रेफर किया जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई बार जान तक चली जाती है, लेकिन यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर दबा दिया जाता है। पीपा पुल बनने के बाद जब पक्के पुल निर्माण की चर्चा सामने आई तो गंडक नारायणी नदी के रेता क्षेत्र के ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी थी। लोगों को लगा कि स्थायी पुल बनने से महाराजगंज, सोहगी बर्वा और आसपास के क्षेत्रों से सीधा संपर्क स्थापित होगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएं सुलभ होंगी।
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ दस्तावेजों से यह आशंका भी जताई जा रही है कि पक्का पुल निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस स्वीकृति नहीं मिली है और ग्रामीणों को केवल आश्वासन के सहारे रखा जा रहा है। इस पूरे मामले में अभी तक गंडक नारायणी नदी पर पक्के पुल निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। फिलहाल यह मुद्दा केवल सोशल मीडिया और जनचर्चा तक सीमित नजर आ रहा है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। भैसहां पक्का पुल निर्माण का सपना कब साकार होगा, यह आने वाले महीनों या वर्षों में ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल रेता क्षेत्र के ग्रामीणों की उम्मीदें अब भी एक ठोस निर्णय की राह देख रही हैं।

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