खैरपुर में ग्राम पंचायत स्तरीय किसान सभा का आयोजन, किसानों को दी गई जानकारी
सोनभद्र कृषि आधुनिकीकरण का नया ईंधन है नैनो उर्वरक, ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी
अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
खेती-किसानी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को करमा विकासखंड के ग्राम पंचायत खैरपुर में एक दिवसीय किसान सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पारंपरिक खाद के बजाय नैनो उर्वरकों के बढ़ते महत्व और उनके वैज्ञानिक लाभों के बारे में विस्तार से जागरूक किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इफको एमसी के टीबीएम धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि किसानों का सुरक्षित भविष्य और दूरगामी आर्थिक हित नैनो उत्पादों के उपयोग में ही निहित है।
उन्होंने जोर दिया कि नैनो तकनीक न केवल लागत कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखती है। वहीं, एमडीए पवन चौधरी ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि अब पुरानी रूढ़ियों और पारंपरिक खेती की जंजीरों को तोड़ने का समय आ चुका है। नैनो उर्वरक समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का आधुनिक संदेश हैं। सभा का संचालन करते हुए एसएफए अवनीश पांडेय ने किसानों को तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इसमें 20% नाइट्रोजन उपलब्ध है। गेहूं की फसल में पहली खुराक दानेदार यूरिया की दें, लेकिन दूसरी खुराक के रूप में नैनो यूरिया प्लस का प्रयोग करें।
इसके लिए 5 मि.ली. प्रति लीटर पानी के अनुपात में 25-30 दिनों के अंतराल पर दो छिड़काव करने चाहिए। गेहूं की बुवाई के समय 5 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन करें। इसके साथ ही फसल पर 5 मि.ली. प्रति लीटर पानी के हिसाब से 1-2 छिड़काव करने की सलाह दी गई।तकनीकी सत्र के अलावा किसानों को अन्य लाभकारी योजनाओं से भी अवगत कराया गयाफसल की गुणवत्ता और वृद्धि के लिए इनके उपयोग पर जोर दिया गया।
किसानों को आकस्मिक सुरक्षा प्रदान करने वाली इस बीमा योजना के बारे में विस्तार से बताया गया। पानी में घुलनशील खादों के सटीक प्रयोग की विधि समझाई गई। इस महत्वपूर्ण किसान सभा में इफको प्रतिनिधियों के साथ-साथ एडीओ सहकारिता (करमा), बीपैक्स सचिव (करमा) और खैरपुर सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों स्थानीय प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। नैनो उर्वरक न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि यह कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम देते हैं, जिससे किसानों की ढुलाई लागत और मेहनत दोनों की बचत होती है।


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