किसान दिवस पर धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान ने निभाया सामाजिक सरोकार, निर्धन किसान की तेरहवीं का उठाया पूरा भार
किसान दिवस पर धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान की अनूठी पहल, निर्धन किसान परिवार की तेरहवीं का उठाया संपूर्ण खर्च
जब योग और कर्मयोग एक हो गए—अन्नदाता के आंगन में सेवा की नई ज्योति
अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर जहाँ पूरा देश अन्नदाताओं को नमन कर रहा था, वहीं सोनभद्र के धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान ने एक कदम आगे बढ़कर मानवीय संवेदनाओं की एक अनूठी मिसाल पेश की है। संस्थान ने न केवल अपने महासदस्यता अभियान 2025 का आगाज किया, बल्कि एक अत्यंत निर्धन मृतक किसान परिवार की सुध लेकर समाज के सामने सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया। मामला चोपन ब्लॉक के सिंदुरिया गाँव का है। यहाँ के निवासी स्व. बचाऊ पटेल का निधन हो गया था, जिनका तेरहवीं संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान 23 दिसंबर को ही संपन्न होना था।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि उनके पास 250 व्यक्तियों के भोज और कर्मकांड के लिए संसाधन नहीं थे। जब परिजनों ने अपनी व्यथा संस्थान के संस्थापक आचार्य अजय पाठक को बताई, तो उन्होंने बिना विलंब किए सहायता का हाथ बढ़ाया। संस्थान के मुख्य संरक्षक एवं नवनियुक्त अध्यक्ष रमेश सिंह और समाजसेवी जुली तिवारी ने परिवार को 100% मदद का भरोसा दिलाया। अंतरराष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर संस्थान की ओर से 250 व्यक्तियों के खान-पान की संपूर्ण कच्ची सामग्री और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सीधे किसान के घर भिजवा दी गईं।
नवनियुक्त अध्यक्ष रमेश सिंह ने बताया कि धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान ने अपने महासदस्यता अभियान 2025 के प्रथम चरण की शुरुआत किसी तामझाम के बजाय एक पीड़ित किसान परिवार की आर्थिक मदद करके की है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल योग सिखाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के सुख-दुख में सहभागी बनना भी है।
Read More सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से ओबरा के ग्रीन माउंटेन स्कूल ने बांधी चमक, वार्षिकोत्सव में उमड़ा जनसैलाबइस पुनीत कार्य में सहयोग कर रहीं समाजसेवी एवं कांग्रेस नेता जुली तिवारी ने कहा अंतरराष्ट्रीय किसान दिवस पर एक मृतक किसान परिवार की सेवा करने का जो सौभाग्य मिला, उसके लिए मैं संस्थान की आभारी हूँ। जब तक मनुष्य के भीतर मानवीय संवेदनाएँ जीवित हैं, तभी तक समाज सुरक्षित है। बिना सेवा के जीवन व्यर्थ है। इस पूरे सेवा कार्य और आयोजन को सफल बनाने में समाजसेवी मोहित अग्रवाल, अखिलेश जिज्ञासु और रंजीत पटेल जैसे सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। ग्रामीणों ने संस्थान के इस कदम की सराहना करते हुए इसे अन्नदाता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।


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