नीलगायों का कहर: 50 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद

वन विभाग कार्यालय से 100 मीटर दूर खेत सूने, अधर में समाधान 

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खजनी, गोरखपुर। खजनी तहसील क्षेत्र के तुर्कवलिया गांव में नीलगायों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। वन्य प्राणी नीलगाय के बढ़ते झुंड किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। बीते दिनों गांव में नीलगायों ने करीब 50 बीघा गेहूं सहित चना, आलू, लहसुन और हरी सब्जियों की फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया। दर्जनों किसानों की तैयार खड़ी फसल देखते ही देखते बर्बाद हो गई, जिससे गांवभर में हड़कंप मचा हुआ है।
 
ग्रामीणों के मुताबिक नीलगायों के झुंडों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई बार 30–40 नीलगाय एक साथ खेतों में धावा बोल देते हैं। झुंड खेतों से गुजरता है तो पूरी फसल पैरों तले कुचल जाती है। सब्जियों की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि कोमल पौधे बेहद आसानी से नष्ट हो जाते हैं। फसल बचाने पहुंचे किसानों को नीलगाय अक्सर आक्रामक होकर दौड़ा लेती हैं, जिससे गांव में भय और असुरक्षा की स्थिति बनी है।
 
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह प्रभावित क्षेत्र वन क्षेत्र अधिकारी खजनी के कार्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बाद भी अब तक किसानों को किसी प्रकार की राहत या सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिली। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार वन विभाग व प्रशासन से शिकायत की, यहां तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। न कोई निरीक्षण, न कोई समाधान—सिर्फ आश्वासन मिलता रहा।
 
किसानों में भारी नाराजगी है।
मकसुदन पांडेय (एडवोकेट), जुगनी पांडे, विनोद पांडे, दुर्गेश पांडे, रत्नेश पांडे, सोमनाथ पांडे, अखिलेश पांडे, रामकेवल, हरभरण, मोहित, पिल्लू सहित कई किसानों ने बताया कि नीलगायों के आतंक से उनकी सालभर की कमाई पर पानी फिर गया है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, वे सबसे ज्यादा संकट में हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नीलगायों को रोकने के लिए प्रभावी उपाय जैसे सुरक्षा फेंसिंग, रात्रिकालीन पहरा, या वन विभाग की निगरानी टीम नहीं तैनात की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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