फ़्लोरोसिस प्रभावित कोन क्षेत्र में जल संकट गहराया हर घर नल योजना बनी अभिशाप

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कोन/सोनभद्र- उत्तर प्रदेश सोनभद्र जिले के विकास खंड कोन में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल योजना (जल जीवन मिशन) धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। विशेषकर फ़्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण शुद्ध पेयजल के अभाव में फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने को विवश हैं। इसी गंभीर समस्या को लेकर, कचनरवा और कुड़वा ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और संबंधित कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव की अगुवाई में ग्राम पंचायत कचनरवा में ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। उनका स्पष्ट आरोप है कि लगभग छह
महीनों से फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप्प है।
 
वरिष्ठ समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव ने दुख व्यक्त करते हुए कहा क्षेत्र में आज भी लोग नदी-नालों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं। जवान भी बूढ़े दिखने लगे हैं, बच्चों के दांत पीले पड़ रहे हैं, और आए दिन लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आकर काल के मुँह में समा रहे हैं। हर घर नल योजना यहाँ के लोगों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। इसके अतिरिक्त, गंगा प्रसाद की अगुवाई में ग्राम पंचायत कुड़वा के ग्रामीणों ने भी प्रदर्शन कर नियमित पानी आपूर्ति की मांग की। प्रदर्शन में दुःखी, अखिलेश, भरत, कलावती, मानवासी, देवंति देवी आदि शामिल रहे।
 
स्थानीय लोगों और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पूरी तरह से सवालों के घेरे में है कई ग्राम पंचायतों में नल कनेक्शन का कार्य पूरा नहीं हुआ है, लेकिन संस्था द्वारा इसे कागजों पर पूर्ण दिखा दिया गया है, जो जाँच का विषय है। पाइपलाइन की गहराई मानक के अनुरूप नहीं है, और इस्तेमाल किए गए पाइपों की गुणवत्ता भी घटिया है, जिसके कारण हल्की बरसात में ही पाइपलाइन जगह-जगह ध्वस्त हो जा रही है। सोन नदी में स्थापित इंटेक का जलस्तर अभी से ही कम है, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की आपूर्ति पर गंभीर संकट आने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
 
ग्रामीणों के आधार कार्ड पर कनेक्शन तो दिए गए, लेकिन कई महीनों से नलों से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। संस्था के कर्मचारी चंद मिनटों के लिए सड़क किनारे पानी चलवाकर फोटो और वीडियो बनाते हैं और लोगों को झूठी दिलासा देकर कागजी कोरम पूरा कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कोन क्षेत्र के कई गाँव, जिनमें कचनरवा, असनाबांध लिंक रोड, बड़ाप, बागेसोती सिंगा, डुबवा, धौरवादामर, सेमरवादामर, गोबरदाहा, डीलवाहा, शिवाखाड़ी, धीचोरवा, बिछमरवा, केवाल, खरौंधी, चांचीकला, और नकतवार शामिल हैं, पानी की आपूर्ति से वंचित हैं। टंकी से सटा गाँव बड़ाप भी इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ लोग प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
 
अनेक गाँवों, जैसे चांचीकला, चांची खुर्द, नकतवार, मिश्री, बहुआरा, डोमा, खरौंधी, रगरम आदि में तो आज तक लोगों को नल कनेक्शन तक नहीं मिल सका है। वहीं, जहाँ कनेक्शन है, वहाँ महीनों से पानी नहीं मिल रहा है।स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।इस बावत जल निगम के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि उनकी तरफ से हरसंभव प्रयास किया जा रहा है कि लोगों को नियमित पानी मिले। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दिन से पानी मिलना शुरू हो जाएगा।यह देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद इन फ़्लोरोसिस प्रभावित गाँवों को दूषित जल पीने की मजबूरी से कब मुक्ति मिलती है।

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