शादी के चंद दिन पहले आधे दर्जन युवा साइलेंट अटैक से गवां दिए जान !

आज के परिवेश व खान पान में अनियमियता के साथ भागदौड़ भरी जिंदगी युवाओ के बन रही अटैक का कारण : सीएमओ

शादी के चंद दिन पहले आधे दर्जन युवा साइलेंट अटैक से गवां दिए जान !

ब्यूरो/शत्रुघ्न मणि त्रिपाठी

गोरखपुर जनपद के दक्षिणांचल का युवा इन दिनों लगातार साइलेंट अटैक के चपेट में  आ रहा है । जिसमे सर्वाधिक मामले शादी रस्म के दो दिन पहले अपनी जान गंवा दिए । ताजा मामला खजनी क्षेत्र मऊ धर मंगल ,पड़ियापर व  बांसगांव थानां क्षेत्र दमोदर पकड़ी के तीन युवा शादी के तीन दिन पहले अपनी जान गवां दिए है ,जिसके वजह लोगो मे चिंता का बजह बन गया है ,आखिर कौन सी वजह है युवा लगातार कम उम्र में ही अपनी जान गंवा दे रहे है । 

हार्ट अटैक चपेट में आ रहे हैं युवा

आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का बोझ पारिवारिक दबाव,भौतिकवादी सुख संसाधन की व्यवस्था को संकलित करने, जैसी तमाम कार्यो को जोड़ने के चक्कर में असमय काल के गाल में समा जा रहे हैं, युवाओं की अनियमित दिनचर्या, अनियमित खान पान, तथा कहीं ना कहीं नशे की लत, बाजार में फास्ट फूड का चलन तथा उसका सेवन युवाओं को डिप्रेशन कि ओर ले जा रहा है , युवाओं के मौत का आंकड़ा पहले सुसाइड के रूप में आता था अब हार्ट अटैक के रूप में आ रहा है।

किस किस गांव में शादी के तीन दिन पहले गंवाई जान

खजनी थानां क्षेत्र के ग्राम सभा मऊ धर मंगल निवासी सूर्य प्रकाश लाल पुत्र स्वर्गीय गिरिजेश लाल की मौत  बीते दिन सोमवार को अचानक सीने में दर्द उठा और जीवन लीला खत्म हो गई , मृतक सूर्य प्रकाश की शादी  29 मार्च को होना था , 26 मार्च तिलक का रस्म पूरी कर शादी की तैयारी में पूरा परिवार लगा हुआ था,  सभी रिस्तेदारी में कार्ड बितरण हो चुका था । लेकिन ईश्वर को नही मंजूर था ,सेहरा पहनने से दो पहले अर्थी उठ गई । वहीँ घर पर आए रिस्तेदार की आँखे भरी रह गई, और परिवार पर बज्र टूट गया । 
 दूसरा मामला पड़िया पार में हुआ जहां एक युवा शादी के तय तिथि के एक दिन पहले ही अपनी जान गंवा दिया । उसी क्रम में बांसगांव क्षेत्र दामोदर पकड़ी में तीन युवाओ ने शादी के पहले जान गंवा दिए । इसी प्रकार युवाओ की जान शादी के पहले जाने का मामला सामने आ रहा है ।

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क्या कहते मुख्य चिकित्साधिकारी

सीएमओ आशुतोष कुमार दुबे  बताते है युवाओ का असामयिक मौत साइलेंट अटैक बदलते परिवेश और टूटते परिवार और मानसिक अनस्टेबलेटी इसका प्रमुख कारण है, परिवार जो है पहले संयुक्त परिवार होता था, तो उसमें जो है बच्चों को देखभाल करने के लिए बाबा चाचा बा मौसी बा सब होते थे , अब माता-पिता दोनों होते हैं, अगर नौकरी वाले हैं नौकरी पर चले जाते हैं बच्चे अलग हो जाते हैं और अगर नौकरी वाले में मजदूरी वाले हैं तो मजदूरी पर चले जाते हैं,  बच्चे नेटवर्किंग की वजह से टीवी और मोबाइल पर काफी समय व्यतीत करते हैं और देश दुनिया की सार्थक चीजों के अलावा अनर्गल चीजों को देखते हैं, और अनर्गल चीजों के वजह से वह अपने को प्रसिद्धि पाने के लिए अनर्गल चीज देखते हैं और उसकी तरफ से प्रेरित होते हैं, पहले लोग जब युवावस्था में थे 20 साल 22 साल होते तो हमारा रोल मॉडल हमारे पिताजी होते थे, या हमारे परिवार का अधिक पढ़ने वाला हमारा भाई भतीजा चाचा मामा नाना मौसी फुआ फूफा या हमारे गुरुजी होते थे, या हमारे गांव के जो भी लोग समरांत लोग होते थे। आज के युवाओं का रोल मॉडल जो है इंटरनेशनल कैरेक्टर्स होते हैं, तो इस चीजों में लोगों में इतनी ज्यादा प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है ,और साधन सीमित होते हैं तो कहते हैं इसलिए वह बहुत अधिक मानसिक तनाव से गुजरते हैं ।उनमें तरह-तरह की मेटाबॉलिक एक्टिविटीज होती है। जिसके कारण किसी को हार्ट अटैक होता है। किसी को वैस्कुलर अटैक्स पढ़ते हैं ,किसी को पढ़ते हैं पूरी सामाजिक उसकी पूरा ढांचा बदल जाता है तो इस तरह मिला करके एक कंप्रिहेंसिव अटैक होता है तो इसी की वजह से यह सब होता है।

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