पशुओं का आहार बनकर रह गया पोषाहार 

फर्जी अंक पत्रों पर नौकरी कर रही कार्यकत्रियों पर मेंहरवान सी डी पी ओ फूलबेहड़ 

पशुओं का आहार बनकर रह गया पोषाहार 

स्वतंत्र प्रभात 
लखीमपुर खीरी बाल विकास परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह गई है। पोषाहार खुले बाजार में पशुओं का आहार बनकर रह गया है। वहीं दूसरी तरफ से शिशु, गर्भवती तथा धात्री महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं।बताते चलें गांव में आंगनबाड़ी केदो पर सरकार बाल विकास परियोजना के मध्य लाखों रुपए खर्च कर रही है। केंद्रों पर बच्चों को पढ़ने लिखने टीकाकरण खेल का सामान पौष्टिक पदार्थ पोषाहार आदि की व्यवस्था की जा रही है।
 
आंगनवाड़ी कार्यकर्ती व सहायिका को वेतन के अलावा भवनो के कायाकल्प का आदेश दिया गया है। और गौरतलब हो कि शिशु एवं गर्भवती माता तथा धात्रियों की मृत्यु दर कम करने के लिए सरकार अति महत्वाकांक्षी योजना बाल विकास परियोजना मानी जाती है। लेकिन भ्रष्टाचारियों व कार्यकृतियों के भ्रष्टाचार के चलते योजना को पलीता लग रहा है। खेलकूद वा पोषाहार आदि वितरण न हो पाने के कारण बच्चे कमजोर हो रहे हैं।
 
वहीं दूसरी तरफ आंगनवाड़ी में अनियमितता  के चलते भवन दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। खुलेआम पोषाहार बाजार में बेचा जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक कार्यकर्ती  से सुपरवाइजर सीडीपीओ व डीपीओ तक पैसों का बंदर वाट किए जाने का मामला जन चर्चा का विषय बना है।बाल विकास परियोजना पैसा कमाने की मशीन बनकर रह गई है। पर इस योजना की जांच एवं निगरानी तथा कोई कार्यवाही ही नहीं होती है। कार्यवाही न होने से अधिकांश लोग शिकायत करने से भी घबराते और कतराते नजर आ रहे हैं।
 
कुछ आंगनबाड़ी केंद्र कार्य कत्री ऐसी भी हैं जिन्हें तैनाती वाले गांव में उत्तर दक्षिण दिशा तक का ज्ञान नहीं है ।और कई कार्यकत्री एवं सहायिका फर्जी अंक पत्रों पर नौकरी कर रही हैं। वह वर्षों से लेनदेन करके अपने पदों पर फर्जी अंक पत्रों के सहारे तैनात देखी जा सकती हैं। आलम तो यहां तक है कि कुछ कार्य कत्री की एवज में दूसरे लोग फर्जी तौर पर कार्यरत हैं। तो कुछ फर्जी डिग्रियों की दम पर नौकरी कर रही है। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत परसेहरी में तैनात मीना कुमारी के अंक पत्रों की जांच कराकर देखी जा सकती है लोगो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया मीना कुमारी फर्जी अंक पत्रों पर बतौर आंगनवाड़ी कार्यकर्ती नौकरी कर रहीं हैं।
 
इसके लिए सीडीपीओ द्वारा कार्य कत्री से ₹1200 प्रति माह तो सहायिका से ₹700 प्रतिमाह वसूल किए जाने का मामला सूत्रों द्वारा प्रकाश में लाया गया है ।कुल मिलाकर बाल विकास परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह गई है ।जब कभी सीडीपीओ फूल बेहड लखीमपुर व निघासन से उनके मोबाइल नंबर 8787 070806 पर 20-20 कॉल करके जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है तो काल जाती रहती है ।घंटी बजती रहती है। लेकिन फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा जाता है ।जिससे उनके पक्ष की जानकारी भी नहीं मिल पाती है।

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