अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा इगलास का मराठा किला

अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा इगलास का मराठा किला

स्वतंत्र प्रभात 

सत्यवीर सिंह यादव
अलीगढ़,।  तहसील इगलास क्षेत्र में सर्वाधिक ऊंचाई वाले स्थान पर स्थित  मराठा किला जो कभी काफी टिकाऊ सुन्दर दिखाई देता था जहां मराठाओं के जाने के बाद वर्षों तक तहसील संचालित रही,  तहसील की दूसरी इमारत तैयार हो जाने के पश्चात उक्त मराठा किले में राजकीय कन्या विद्यालय चला था, जबसे राजकीय कन्या विद्यालय वहां से हटा हैं। किले का रख रखान न होने के कारण किला खंडर में तब्दील होता जा रहा है।


बताया गया है कि इगलास नगर में काफी ऊंचे टीले पर स्थित मराठाओं द्वारा सन 1856 ई० में बहुत ही मजबूत किला, बनवाया गया था । किले के चारों तरफ चार बहुत ऊंचे गुम्मद वन है ,जिसमें दो गुग्मद रख रखाव के अभाव में जर्जर होकर धराशायी हो चुके है। किले के अन्दर कोषागार हवालात इत्यादि अन्य कमरे बने हुये है ,किले के गुम्मदों पर पुलिस जवान रहते थे । गुम्मदों में छिद्र है ,जिनके द्वारा मराठा जवान अपने शत्रु को परास्त कर सकते थे और स्वयं को बचा सकते है।

मराठाओं के जाने के पश्चात उक्त किले में वर्षों तक तहसील संचालित रही है। तहसील की नई इमारत हाथरस मार्ग पर तैयार हो जाने पर तहसील अपनी नई इमारत में परिवर्तित हो गई। तहसील दूसरी जगह परिवर्तित हो जाने के बाद उक्त किले में राजकीय कन्या विद्यालय संचालित होने लगी लेकिन शासन प्रशासन अथवा  किसी जन प्रतिनिधि ने किले की दुर्दशा को  सुधारने की और ध्यान नही दिया है।

किले की जर्जर दशा को देख राजकीय कन्या विद्यालय भी यहां से हटकर गांव कजरौठ पहुच गया है। नगर के पूर्व सभासद सुभाष चन्द्र शर्मा का कहना है कि तमाम जन प्रतिनिधि किला का फोटो तो खींच कर ले गये है किन्तु इस की दुर्दशा को सुधारने का प्रयास नहीं किया है।

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