पत्रकरो पर हमले को लेकर शून्य दिखा प्रशासन कार्यवाही के नाम मात्र खानापूर्ति

पत्रकार के हमले की खबर करने पर की गई अभद्रता के साथ मिल रही झूठे मुकदमे में फसाने की धमकी

पत्रकरो पर हमले को लेकर शून्य दिखा प्रशासन कार्यवाही के नाम मात्र खानापूर्ति

एसपी बलरामपुर को पत्रकार धमकी पर हुई शिकायत पर कार्यवाही नही

विशेष संवाददाता मसूद अनवार की रिपोर्ट 

बलरामपुर

उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ का यह दावा कहां तक सही है कि पत्रकारों का उत्पीड़न अब बर्दास्त नही और पत्रकारो पर हमले को लेकर उच्च न्यायालय के यह आदेश प्रभावी बनाया जाय जिसमे पत्रकार पर हमले य उत्पीड़न पर स्थानीय प्रशासन तत्काल मुकदमा पंजिकृत कर सख्त कार्यवाही करते हुए अपराधियों को जेल भेजे। जिसके सम्बंध में अगर कार्यवाही न हो तो दोषी एसपी होगा। वही प्रेस काउंसिल का यह निर्देश की पत्रकार भीड़ का हिस्सा नही है और सभी पुलिस और आर्मी के अधिकारियों को इसका ध्यान रखना होगा कि पत्रकार भीड़ नही ।जबकि शासनादेश की बात की जाय तो पत्रकार उत्पीड़न और अभद्रता पर 50 हजार का जुर्माना और 3 वर्ष कैद का माननीय उच्च न्यायालय के आदेश में उललेख है।लेकिन इसका पालन धरातल पर शून्य दिखाई दे रहा है।जिसकी तस्वीर जनपद बलरामपुर में लगातार पत्रकारो पर हो रहे जानलेवा हमले ,अभद्रता और पत्रकार उत्पीड़न पर जिला प्रशासन और एसपी केशव कुमार की चुप्पी बड़ा सवाल उतपन्न कर रही है ।

जब क्षेत्रों में लगातार अपराध करने वाले लोगो द्वारा अपराध का खुलासा करने हेतु खबरों के लिखने पर पत्रकारों पर अपराधियो द्वारा हमला करवाया जाता है ।जिसपर स्थानीय थाना तुलसीपुर में थाना प्रभारी का यह उत्तर घायल पत्रकार रमेश गुप्ता से कहा जाता है कि रंग डाल का आएहो।उसके बाद जब सहयोगी पत्रकारो द्वारा हमले की खबर शोसल मीडिया पर वायरल होती है तब कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ती करते हुए जानलेवा हमले पर मामूली धाराओं में मुकदमा पंजिकृत किया जाता है लेकिन अपराधियो पर न कोई पकड़ न अंकुश लगाया जाना अपने आप मे बड़ा सवाल पैदा कर रहा। और इसके साथ ही जब कोई कार्यवाही न होता देख पत्रकार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सारे घटना को उच्च अधिकारियों को अवगत कराने का प्रयास किया तो विवेचना अधिकारी ने अपनी आख्या रिपोर्ट में जो आख्या लगाया वह समझने के लिए काफी है क्योंकि सारे मामले को धारा 151,107,116 में एक को पकड़ खानापूर्ति कर दी जाती है जबकि डॉक्टरी परीक्षण जो पुलिस के द्वारा करवाया गया उसका कोई उल्लेख तक नही किया जाता है ।इसके साथ पत्रकार पर हमले किये जाने को लेकर तथ्यों के आधार पर खबर लिखने पर उस पत्रकार के साथ अभद्रता कर उसका अपमान किया जाता है और उसे महिला उत्पीड़न के फर्जी व झूठे मुकदमे में फसाने की बात की जा रही है । और साथ ही जान से मारने की धमकियां मिल रही की जानकारी सूत्रों द्वारा मिल रही है।जिसको लेकर एसपी केशव कुमार को पत्रकारों ने कार्यालय पहुच अवगत कराया जिसपर उनका यह आश्वासन की अपराधियो पर कार्यवाही की जाएगी । लेकिन अब तक अपराधियो पर कोई कार्यवाही न किया जाना माननीय न्यायालय के आदेशों का उलंघन जैसा है और आखिर किन शक्तियों के दबाव में जिले के तेजतर्रार एसपी को झुकना पड़ा ।जिसको देख यही साबित करने के लिए पर्याप्त है कि पत्रकार हित को लेकर माननीय न्यायालय व मुख्यमंत्री के सारे आदेश सिर्फ फाइलों में ही सीमित है धरातल पर उनका कोई महत्व नही ।

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