वोट की राजनीति के लिए हो रहा है रामचरित मानस का अपमान-  श्याम बिहारी,ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र का मिलन स्थल ही है अयोध्या गायत्री शक्तिपीठ 

वोट की राजनीति के लिए हो रहा है रामचरित मानस का अपमान-  श्याम बिहारी,ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र का मिलन स्थल ही है अयोध्या गायत्री शक्तिपीठ 

स्वतंत्र प्रभात 

अयोध्या।अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा देवकाली बाईपास के निकट गोकुल रिसॉर्ट में आयोजित 51 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण की कथा में अमृत वर्षा करते हुए शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे पंडित श्याम बिहारी दुबे ने कहा कि गायत्री की उपासना मंत्र और माता दोनों के रूप में की जाती है। सगुण साकार श्रद्धा को जागृत करने के लिए गायत्री माता स्वरूप है और निर्गुण निराकार ज्ञान को जागृत करने के लिए गायत्री मंत्र स्वरूप है। उन्होंने उपस्थित लोगों को भागीदारी दीक्षा प्रायश्चित दीक्षा आदि के बारे में भी बताया। प्रसंगवश उन्होंने कहा गोस्वामी तुलसीदास की एक चौपाई को लेकर  कुछ लोग वोट की राजनीति के लिए उन्हें नारी जाति का अपमान करने वाला बता रहे है जबकि गोस्वामी जी ने नारी का सम्मान किया है उन्होंने रामचरितमानस के बालकांड के प्रथम श्लोक में ही वाणी धारिणी अर्थात नारी की वंदना की है इसके बाद उन्होंने गणेश जी की आराधना किया है और भगवान राम ने तो भीलनी शबरी को माँ का दर्जा दिया तथा नाम रूपी मंत्र को जपने के लिए देते हुए वेद पढ़ने का अधिकार दे दिया।गायत्री शक्तिपीठ अयोध्या के व्यवस्थापक रामकेवल यादव ने युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा स्थापित गायत्री शक्तिपीठ अयोध्या के महत्व के बारे में बताया कि महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र का योग मिलन जिस  स्थान पर हुआ उसी स्थान पर गायत्री शक्ति पीठ विराजमान है इसी स्थान से ऋषि विश्वामित्र राम लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा हेतु बला-अतिबला विद्या से विभूषित कर अपने साथ ले गए थे। उन्होंने बताया वर्ष 1981में वेदमूर्ति युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने इस स्थान पर पहुंचते ही कहा था कि इस स्थान से मेरा पुराना नाता है इस स्थान के तत्कालीन मालिक ने उन्हें यह स्थान लिखा पढ़ी में प्रदान कर दी। उन्होंने प्रारंभ में देश की  जिन 24 शक्तिपीठों के निर्माण का संकल्प लिया था वर्णाक्षर क्रम में अयोध्या उनमें से प्रथम है।यहाँ 2002 में पहुंचे गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पंड्या जी ने इस शक्तिपीठ को मिनी शांतिकुंज के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। 6 मई 2022 को देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पंड्या जी के द्वारा भूमि पूजन के बाद यहां पर ₹24 करोड़ की लागत से निर्मित होने जा रही बहुमंजिला इमारत प्रज्ञा भवन का निर्माण अनवरत चल रहा है जहां पर देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए साधना प्रशिक्षण भोजन आवास आदि की व्यवस्थाएं रहेंगी। 
इस अवसर पर सैकड़ों लोगों को आचार्य ने सामूहिक रूप से दीक्षा प्रदान किया। आयोजन मंडल के देशबंधु तिवारी रामकेवल यादव रामअवतार गर्ग अमरनाथ पांडेय मार्कण्डेय पाल भगवती प्रसाद श्रीवास्तव मनीराम वर्मा संजय सिंह विनोद सिंह के के गुप्ता रमाकांत पांडे विजय शंकर पांडे रणविजय नेहा देवी अनीता तिवारी श्यामरती यादव माधुरी तिवारी नीलम मिश्रा डॉ अनुराग तिवारी अनुपम तिवारी कृष्णा सिंह आदि सकड़ों लोग उपस्थिति रहे।

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