घाघरा नदी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से तराई की जनता कर रही त्राहि-त्राहि

घाघरा नदी में आज छोड़ा गया शारदा बैराज गिरजा बैराज से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी

घाघरा नदी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से तराई की जनता कर रही त्राहि-त्राहि

रामनगर के दर्जनों गांव के लोग भुखमरी के कगार पर तहसील प्रशासन के द्वारा नहीं वितरित किए गए लंच पैकेट

कृष्ण कुमार शुक्ल
रामनगर बाराबंकी।


 तहसील रामनगर अंतर्गत घाघरा नदी में आज करीब 3:30 लाख क्यूसेक पानी  सरयू नदी में छोड़ा गया है।बाराबंकी बाढ़ खंड अधिकारी शशिकांत सिंह ने बताया नदी प्रति घंटे की रफ्तार से 1 सेंटीमीटर घट रही है, परंतु नदी का जलस्तर सामान्य है आज का जलस्तर  शाम के 6:00 बजे का 107. 316 है जो खतरे के निशान से 118 सेंटीमीटर ऊपर घाघरा नदी बह रही है ।आपको बता दें लाखों क्यूसेक बाढ़ का पानी पड़ोसी देश नेपाल के द्वारा गिरजा बैराज शारदा बैराज से छोड़ा गया है,

घाघरा नदी में आज छोड़ा गया शारदा बैराज गिरजा बैराज से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी

 जिससे तराई के गांवों में कोहराम मच गया है। सैकड़ों ग्राम सभाएं जलमग्न हो गई है।बाढ़ पीड़ित ग्राम सभा लोहटी जई केशियापुर, लोहटी पसई, मथुरापुरवा, मीतपुर में बाढ़ का पानी भर गया है। सैकड़ों ग्रामीणों ने आरोप लगाया की तहसील प्रशासन के द्वारा किसी प्रकार की कोई बाढ़ राहत सामग्री वितरित नहीं की गई है पानी पीने लायक हैंडपंप डूब चुका है खाने-पीने के लाले हैं तहसील प्रशासन के द्वारा हाल-चाल तक भी नहीं लिया गया है वही मीतपुर के निजामुद्दीन पुर के दर्जनों ग्रामीणों ने कहा कि हमारे सबके घर पानी से डूब चुके हैं

 लेकिन कोई भी राहत सामग्री अभी तक नहीं वितरित की गई है,तहसील प्रशासन ने हाल पूछना भी मुनासिब नहीं समझा है। आपको बता दें सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के द्वारा यह अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि पैसे की किसी प्रकार की कमी नहीं है सभी को समान रुप से बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ राहत सामग्री वितरित की जाए परंतु बाढ़ पीड़ितों के साथ छलावा किया जा रहा है केवल 500 पैकेट लंच के बांटे गए हैं हेतमापुर के पास और रामनगर के तराई के इलाके तपेसिपाह कोरिनपुरवा, लहडरा,मढ़ना दुर्गापुर, मीतपुर, लोहटी पसई के ग्रामीण भूखे सो रहे हैं 

घाघरा नदी में आज छोड़ा गया शारदा बैराज गिरजा बैराज से साढ़े तीन लाख क्यूसेक

प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं की गई है कई गांव में तो नाव भी ग्राम प्रधानों के द्वारा नहीं दी गई है। तहसील प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। वही केसियापुर मजरे लोहटी जई के सैकड़ो ग्रामीणों ने उप जिला अधिकारी रामनगर को प्रार्थना पत्र देखकर बताया है की मथुरा पुरवा लोहटीजई में बाढ़ राहत सामग्री वा नाव अभी नहीं लगाई गई है।

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