उपायुक्त निशांत कुमार यादव के निर्देशानुसार उप-सिविल सर्जन एवं पी.एन.डी.टी. के नोडल अधिकारी

करनाल डॉ. नरेश करड़वाल द्वारा गत दिवस शहर में अल्ट्रासांउड़ केन्द्रों की जांच की गई। इस दौरान 7 सैन्टर चैक किए गए। इनमें से एक्ट की अवहेलना करते पाए जाने पर, इन्द्रा आईवीएफ की अल्ट्रसाउंड मशीन को, पी.सी. एण्ड पी.एन.डी.टी (प्री-कॉन्सैप्सन एण्ड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टैकनिक्स) यानि पूर्व संकल्पना और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के अन्तर्गत सील कर दिया गया। अतिरिक्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनु शर्मा व डॉ. संजीव चांदना चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद रहे। नोडल अधिकारी द्वारा सैन्टर संचालकों से अपील की गई कि वे एक्ट के तहत सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशानुसार कार्य करें।  उन्होंने यह भी बताया कि जिला में अल्ट्रासाउंड केन्द्रों की चैकिंग का कार्य इसी तरह से जारी रहेगा। 

  दूसरी ओर उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने लोगों का आह्वान किया है कि वे बेटियों के प्रति अपनी रूढि़वादी सोच में बदलाव लाएं। बेटियों को भी बेटे जैसा एक समान अधिकार दें, क्योंकि लड़कियां आज के समय में लड़कों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नही है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से लोगों में एक जागृति आ रही है और इससे लिंगानुपात में भी निरंतर सुधार हो रहा है। जिला  में लिगांनुपात बढ़कर 900 का आंकड़ा पार कर गया है।

उपायुक्त ने कहा कि समाज में समानता बनाए रखने के लिए बेटा और बेटी दोनों की एक समान जरूरत है। कन्या भ्रूण हत्या जैसे घिनौने अपराध से न केवल उस परिवार को पाप लगता है, बल्कि इससे समाज को भी बहुत बड़ी क्षति हो रही है।  एक अच्छे समाज के निर्माण के लिए महिला व पुरुष दोनों का समान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को जन्म लेने दें और उन्हें अच्छी शिक्षा दें तथा दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाएं। 

उन्होंने कहा कि जिला में पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है तथा सभी अल्ट्रासाउंड के द्रों पर कड़ी नजर है। उन्होंने डाक्टरों को भी सचेत किया है कि वे थोड़े से लालच के कारण अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भ में कन्या भू्रण की जांच न करें, बल्कि लोगों को समझाएं कि आधुनिक युग में लड़का और लड़की में कोई फर्क नही हैं। उन्होंने महिलाओं से भी कहा है कि वह सामाजिक बुराइयों को रोकें तथा अपनी आवाज को बुलंद करे, प्रशासन आपके साथ है।  कन्या भू्रण की जांच करने व करवाने वाले के बारे में सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम प्रशासन द्वारा गुप्त रखा जाएगा तथा उसे 1 लाख रूपये का ईनाम भी दिया जाएगा। करनाल जिला में अब तक ऐसे 10 व्यक्तियों को 10 लाख रूपये का ईनाम दिया जा चुका है।

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