तुर्कीः हाया सोफिया संग्रहालय बना वैश्विक चर्चा का केंद्र

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तुर्की के इंस्तान्बुल में ढेड़ हज़ार साल पुरानी मशहूर इमारत हाया सोफिया एक बार फिर से चर्चा में है। छठी सदी, जब ये बनी तो ये एक चर्च थी, फिर मस्जिद बनी, फिर एक संग्रहालय। लेकिन अब ये फिर से एक मस्जिद में बदल दी गई है.

तुर्की में आख़िरकार इस्तांबुल के हाया सोफिया संग्रहालय को एक मस्जिद में बदल दिया गया। तुर्की राष्ट्रपति रेचप आर्दोआन के इस फैसले पर देश की शीर्ष अदालत ने भी अपनी मुहर लगा दी। तुर्की में इस घटना को लेकर अमेरिका, रूस और ईसाई धर्म गुरुओं ने भी अपनी नाखुशी जताई है। क्रिस्टीन बाइज़नटाईन से लेकर उसमानिया साम्राज्य तक और फिर कमाल अतातुर्क पाशा जैसे शासकों के कई दौर इस हाया सोफिया ने देखे..जिसे एक संग्रहालय के रूप में देखने के लिए पर्यटक पूरी दुनिया से आते रहे हैं।  

यहां तक कि इस फैसले के पहले ही ग्रीस ने कहा था कि तुर्की का ये फैसला ईसाई देशों के साथ रिश्तों में एक भावनात्मक दरार बना देगा। निश्चित रूप से राष्ट्रपति आर्दोआन इस फैसले के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री माईक पॉम्पियो ने भी तुर्की से आग्रह किया है कि हाया सोफिया की यथास्थिति बनाए रखनी चाहिेए और ये सुनिश्चित करना चाहिेए कि इस तक सबकी पहुंच बरक़रार रहे। 

दुनिया भर की 30 करोड़ के आध्यात्मिक प्रमुख इक्यूमेनिकल पाट्रियाक बार्थोलोम्यु ने कहा है कि हाया सोफिया को मस्ज़िद में बदलने से ईसाईयों को धक्का लगेगा। 537 ईस्वी में तब के कुस्तुनतूनिया में बेज़नटाइन साम्राज्य द्वारा बनाए गए हाया सोफिया सबसे बड़े कैथेड्रलों में से था, लेकिन इसके 900 सालों बाद सन 1453 ईस्वी में इसे उसमानिया शासकों ने एक मस्जिद में बदल दिया था। लेकिन 1934 में इतिहास ने एक बार फिर करवट ली और तुर्की के आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष शासक कमाल अतातुर्क ने हाया सोफिया को एक संग्रहालय में बदल दिया था। 

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