तहसील प्रशासन की लापरवाही के चलते तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो रहा

माल/ लखनऊ

क्षेत्र के तालाबों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने में तहसील प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है।जिससे पंचायतोंके सुरक्षिततालाब अतिक्रमणका शिकार होते जारहे है।तहसीलकेजिम्मेदार मूकदर्शक भूमिका में हैं।मलिहाबाद तहसील में सरकार का अवैध कब्जा मुक्त जमीनों का अभियान मात्र कागजी बनकर रह गया है।जहां पंचायतों में सुरक्षित जमीनों पर ग्रामीणों ने अवैध कब्जे कर अट्टालिकाएं खड़ी कर ली हैं।

दूसरे ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद भी जिम्मेदार जानकर भी अनजान बने हुये हैं।ऐसा ही मामला रनीपारा पंचायत का है जहां चरागाह की जमीन पर एक कालोनी विकसित हो चुकी है। कुछ ग्रामीणों ने आवाज बुलंद की तो जिला अधिकारी ने कालोनी ढहाने का निर्देश जारी किया लेकिन यह आदेश मूर्तिरूप नहीं ले सका।थरी पंचायत में गांव के बीच स्थित लगभग दो बीघे का तालाब वर्तमान में लगभग आठ बिसुआ रह गया है।पारा भदराही पंचायत के सुरति खेड़ा गांव में तीन छोटे तालाबों के नमो निसान मिट चुके हैं।

वोट बैंक के चलते ग्राम प्रधान भी आंखे बंद किये रहते हैं।वहीं पीरनगर गांव में ढाई बीघे का खजुहा नामक तालाब वर्तमान में मात्र छह बिसुआ रह गया है।दो वर्षपूर्व जिला अधिकारी राजशेखर ने तहसीलदार को तालाब देखकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था जो मौके पर आज तक नहीं पहुंचे।इस तालाब पर अवैधकब्जेदारों ने दशकों से कब्जा कर हजारों की गेंहूँ फसल काट रहे है।

यही नहीं इसी गांव में स्थित चरागाह की साढ़े बारह बीघा जमीन में अवैध रूप से खनन कर सात छोटे बड़े तालाबों के रूप दे रखे हैं लेकिन शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुये हैं।यह तो मात्र कुछ नमूने हैं कोई भी पंचायत अवैध कब्जों से अछूती नहीं है।इसी ढिलाई के चलते अवैध कब्जों का सिलसिला थमने का नाम नहीं  ले रहा है।P 10