समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता : समानता और विविधता के बीच संतुलन

कानून किसी समाज की केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं होता, बल्कि वह उसकी सामाजिक चेतना, न्याय-बोध और बदलती परिस्थितियों का दर्पण भी होता है। मानव सभ्यता के आरंभिक दौर में विवाह, परिवार, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे विषय मुख्यतः परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

समान नागरिक संहिता का गुजरात मॉडल: एक देश एक कानून की दिशा में निर्णायक कदम

गुजरात विधानसभा में पारित ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक, 2026’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि भारतीय समाज की संरचना में एक व्यापक बदलाव का संकेत है। यह विधेयक उस लंबे विमर्श का परिणाम है, जो दशकों से “समान नागरिक कानून”...
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