नागरिक जागरूकता

सोशल मीडिया का शोर और लोकतंत्र की खामोशी

राजीव शुक्ला लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है जनता की आवाज सुनी जाए, सत्ता से सवाल पूछे जाएं, असहमति का सम्मान हो और नागरिकों को सही जानकारी के आधार पर अपना...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

संस्थागत साख और सत्ता का खेल

महेन्द्र तिवारीएक समय था जब राजनीति को महज विचारधाराओं का टकराव माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जो हमने देखा है, वह किसी साधारण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से कहीं अधिक गहरा और भयावह है। इसे केवल...
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