मां की मेहनत

बेटी की फीस के लिए...!

यूं नंगे पाँव दौड़ी माँ, साड़ी में लिपटी थी ममता, आँखों में एक सपना "बेटी" की पढ़ाई व क्षमता। रास्ते में पत्थर-दग्गड हैं आए, पाँवों में चुभते रहे, लोग तमाशा देखते रहे, "माँ" कदम बढ़ाती रही।    न जूते की चाह...
कविता/कहानी  साहित्य/ज्योतिष