भारतीय विधि व्यवस्था

समान नागरिक संहिता : समानता और विविधता के बीच संतुलन

कानून किसी समाज की केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं होता, बल्कि वह उसकी सामाजिक चेतना, न्याय-बोध और बदलती परिस्थितियों का दर्पण भी होता है। मानव सभ्यता के आरंभिक दौर में विवाह, परिवार, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे विषय मुख्यतः परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं...
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