प्रवासी मजदूरों की महिलाओं में प्रभात जायसवाल ने बंटवाए सेनेटरी, पैड किया जागरूक-

प्रवासी मजदूरों की महिलाओं में प्रभात जायसवाल ने बंटवाए सेनेटरी पैड किया जागरूक-

प्रवासी मजदूरों की महिलाओं-में-=प्रभात-जायसवाल-ने-बंटवाए-सेनेटरी-पैड-किया-जागरूक


बिस्कोहर, सिद्धार्थनगर। इस कोरोना महामारी में जहाँ पूरा देश परेसान है वही बिस्कोहर व्यापार मण्डल अध्यक्ष जब से कोरोना महामारी भारत मे दस्तक दी है। हर तरह से लोगो की मद्दत कर रहे है लोगो को जागरूक कर रहे है,

वो इस महामारी में को लेकर तब वह और सम्बेदनशील नजर आए जब वह गरीब प्रवासी मजदूर जो आज लॉकडाउन होने के वहज से गाँव आने पर मजबूर है ऐसे में उनके पास ना खाने को कुछ है ना पीने को प्रभात ने आजमानवता इंसानियत का काम कर के यह साबित कर दिया

कि जहाँ एक तरफ लड़कियों को कमजोर समझने वाले लोग है वही दूसरी तरफ प्रभात जैसे लोग है जो लड़कियों को हर परिस्थितियों से लड़ने को तैयार करते है।

प्रभात जायसवाल ने कहा कीमेन्स्ट्रुएशन हाइजीन डे हर साल 28 मई को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मासिक धर्म यानी पीरियड्स से जुड़ी समाज की विचारधारा को बदलना है। मई महीने की 28 तारीख को इसलिए चुना गया, क्योंकि महिलाओं में मासिक घर्म का चक्र 28 दिन का होता है।

आज भी इस चक्र से गुजरने के दौरान महिलाओं को शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ सामाजिक पीड़ा से भी गुजरना पड़ता है। आज भी महिलाओं को इन दिनों में अपवित्र समझ कर पूजा,रसोई आदि जैसे स्थानों से दूर रखा जाता है।

आज भी न जाने कितनी ही महिलाओं के लिए हर माह सैनिटरी पैड मंगवाना या स्वयं खरीद कर लाना और फिर  इस्तेमाल के बाद छिपाते हुए  फैंकना एक जीने मरने जैसा प्रश्न बना रहता है। इस चक्र के दौरान एक महिला के साथ उतना ही सामान्य व्यवहार होना चाहिए जितना अन्य दिनों में।

क्योंकि उन दिनों में तो उसके शरीर में होने वाली पीड़ा और मूड स्विंग्स स्वयं ही उसके लिए परेशानी का सबब बने रहने के लिए काफी हैं।हर पुरुष से प्रार्थना है कि अपनी बहन, माँ, दोस्त या अन्य किसी महिला को कभी इस चक्र के दौरान किसी भी परिस्थिति में मायूस पाएं तो परेशानी साझा करें

उनकी सच में जिस दिन वह अपने पिता, भाई, बेटे से इस विषय पर खुलकर वैसे ही बात कर सकेगी जैसे मामूली से सिर दर्द में करती वर्तमान में जरूरतमंद मजदूर परिवारों की महिलाओं के लिए इस पक्ष पर भी हम सबको आगे आना होगा। माहवारी  महिलाओं की वो ताकत है जो विश्व को ममत्व के साये में रखकर विश्व को सतत् चलायमान बनाये हुयी है।