बाजार से रेडीमेड ड्रेस खरीदकर विद्यालयो में करा दिया गया वितरण

बाजार से रेडीमेड ड्रेस खरीदकर विद्यालयो में करा दिया गया वितरण

भदोही।

जनपद के सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में यूनिफॉर्म वितरण करने वाली फर्मों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। बाजार से रेडीमेड ड्रेस खरीदकर विद्यालयो में वितरण करा दिया गया और सिलाई की रकम आपसी बन्दरबाट करते हुए डकार लिया गया।

फर्मो और नोडल अफसरों की मिलीभगत से हुए खेल की जांच फिलहाल एस आईवी (विशेष अनुसंधान शाखा) कर रही है, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर ने बेसिक शिक्षा विभाग से फर्मो का पूरा लेखा-जोखा तलब किया है। प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक बच्चे को जुलाई में 2 जोड़ी यूनिफॉर्म सरकार की ओर से दिए जाते हैं सत्र 2013--14,2014--15 और 2015--16 में यूनिफॉर्म के लिए करीब 20 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हुई। इसके उपरान्त फर्मो के माध्यम से यूनिफॉर्म का वितरण कराया गया था

मानक के अनुसार पंजीकृत संस्थाओं को यूनिफॉर्म की सिलाई कराने के बाद वितरण करना था लेकिन एक भी संस्था ने सिलाई नहीं कराई सभी ने दुकानों से रेडीमेड ड्रेस खरीद कर विद्यालयो को आपूर्ति कर दी। अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी के द्वारा माँगी गयी आरटीआई के उपरांत भी बेसिक शिक्षा विभाग से जानकारी नहीं दी गई।

अधिवक्ता ने वाणिज्यकर विभाग को पत्र भेजकर जांच कराने की मांग की। आरोप लगाया था कि फर्मो ने राजस्व की चोरी की है। फर्मो की ओर से यूनिफॉर्म सिलाई के जो केन्द्र दर्शाए गए हैं वह है ही नहीं।

प्रकरण की जांच एसआईवी कर रही है अब असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर संजय कुमार सिंह ने आपूर्तिकर्ता फर्म का नाम व्यापारी का नाम,टीन नंबर,बिल नंबर समेत अन्य सभी कागजात सूची में उपलब्ध कराने के लिए

बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है। प्रकरण की जिस तरीके से जांच पड़ताल चल रही है इसमें फर्मों के साथ-साथ नोडल अफसरों की गर्दन फंसनी तय मानी जा रही है क्योकि वर्ष 2017--18 मे 05 फर्मो पर राजस्व चोरी का आरोप तय हो चुका है।

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