प्राचीन दुर्गा मंदिर की कहानी।

प्राचीन दुर्गा मंदिर की कहानी।

(प्राचीन दुर्गा मंदिर की कहानी )

सबकी मनोकामना पूर्ण करती है वरडीहा वाली दुर्गा माई नो दिन रहता है मेले जैसा माहौल उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के लाररोड स्टेशन से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर वरडीहा दलपत स्थिति प्रसिद्ध प्राचीन दुर्गा मन्दिर की विशेषता है कि जो भी मन्ते मागी जाती है पुर्ण होती है।

बहुत पुरानी बात है जब वीरखौली गांव के यादवो की भैस तलाब मे आकर बैठती थी इसी दौरान एक भैस के सिंघ से पथर नुमा प्राचीन काल की मां की मुर्ति से तकरार सिंघ टुट गया काफी खुन भी बहने लगा व प्राचीन मुर्ति से भी खुन के फुहारे बहने लगे व कुछ देर बाद भैंस मर गयी व भैस का मालिक भी मर गया लगातार वीरखौली गांव की भैस मरने लगी क्षेत्र मे दहसत का माहौल हो गया

डर के मारे इस गांव के लोग तलाब से प्राचीन मां की प्रतिमा भी नही निकाल रहे थे फिर गांव की बेटी श्रीमती दल सिंगारी देवी ने सोचा मेरा तो कोई नही है पती व दो बेटे तो हमे छोड़कर इस दुनिया से पहले ही चले गए है चलो हम ही तलाब से मां की प्रतिमा को बरगद के पेड के नीचे रखकर पुजेगे।

व अपने भाई बीरबहादुर सिंह के लिए पुत्र की मन्ते मागेगे । दल सिंगारी देवी के भाई बीरबहादुर सिंह की दो शादी होने के बाद भी कोई अवलाद नही था दल सिंगारी देवी की मन्ते मां ने सुन ली व उनके भाई को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ जिसका नाम दल सिंगारी देवी ने मां के ही नाम पर दुर्गाशरण सिंह रख दिया यह खबर जानते ही पुरे क्षेत्र मे चर्चा का विषय बन गया यहा आकर लोग अपनी मन्ते मागने लगे व लोगो का आस्था भी बडने लगा फिर दल सिंगारी देवी ने मां से मन्ते मागी की मेरे भाई को एक और पुत्र हो जाय

तो आप का मन्दिर बनवा दुगी उनकी ये भी मन्त मां ने पुर्ण कर दी इन्हे दुसरा भतीजा रणधीर सिंह के रूप मे भी मिल गया । फिर सन् 1954 मे श्री मती दल सिंगारी देवी द्वारा मन्दिर का निर्माण कराया गया ।जहां दुर दुर से लोग आकर अपनी मन्ते मांगते है नवरात्र मे तो पुरे नो दिन मेले जैसा माहौल रहता है । हम राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार रामू यादव मां की महिमा जानने के लिए जब वहा पहुचे तो उपयुक्त बाते गांव के लोगो सहीत वीरखौली गांव के सुरेंद्र यादव, रामेश्वर प्रजापति व श्रीमती दल सिंगारी देवी के भतीजे व मां की कृपा से हुए वरडीहा दलपत निवासी दुर्गाशरण सिंह ने बताइए । पुराणो मे स्त्री व कन्या का महत्व सृष्टि को चलाने के लिए एक स्त्री आवश्यक थी स्त्री मे ही यह गुण इश्वर प्रदत्त है कि यह एक समय मे कई कार्य कर सकती है जो दल सिंगारी देवी ने कर दिखाया वे इस दुनिया मे नही है पर क्षेत्र के लोगो नवरात्रि कन्या व मातृ शक्ति की आराधना के रूप मे नवरात्र के पर्व को इस गांव मे धुम धाम से मना रहे है ।नवरात्रि मे शक्ति और कन्या के महत्त्व को रेखांकित कर रहे है यहा के क्षेत्रीय लोग।

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