आदमी ही नहीं,रुपया भी टूटा है साहब

आदमी -ही -नहीं,रुपया -भी- टूटा -है -साहब
महाबली कोई और नहीं सचमुच कोरोना है. इस कोरोना ने आम आदमी और ख़ास सरकारों के साथ भारतीय रूपये की भी कमर तोड़ दी है. भारत  में कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना जिस गति से अपने पांव पसार रहा है उससे डरकर भारतीय रुपया भी डालर के मुकाबले 32  पैसा टूट गया .रूपये का टूटना बहुत मायने रखता है ,लेकिन इसके बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही .
मुझे आज ही पता चला की कोरोना के कारण भारतीय रुपया अचानक टूटा है. जानकार बताते हैं कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच रुपया बीते 9 महीने के न्यूनतम स्तर पर फिसल चुका है. डॉलर के मुकाबले रुपये 75.19 के स्तर पर है. रुपये में इस कमजोरी से घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ सकती है.आपको पता ही है कि  भारत में कोविड-19 के मामले लगातार नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे हैं. सोमवार को देशभर में 1 लाख 68 हजार से ज्यादा मामले आए हैं. विभिन्न राज्यों की सरकारें मौजूदा महामारी को नियंत्रित करने के लिए नाइट कर्फ्यू समेत कई तरह के प्रतिबंध लगा रही हैं.
कोरोना आम आदमी के साथ रूपये को भी ले डूबेगा ये किसी ने सोचा नहीं था,जानकार कहते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते मामले और अर्थव्यवस्था पर इसके पड़ते असर की वजह से रुपये में कमजोरी देखने को मिल रही है. सोमवार को शुरुआती सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया 75.19 के स्तर पर लुढ़क चुका है. इसके साथ ही प्रति डॉलर रुपये का भाव बीते 8 महीने के निचले स्तर पर चला गया.
अनादर की खबर ये है कि बढ़ती महंगाई के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक बड़े स्तर पर सरकारी बॉन्ड्स खरीद रहा है. हाल ही में आरबीआई द्वारा करीब 1 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदारी की खबरों के बाद रुपये में दबाव देखने को मिला. साथ ही अब संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच आशंका है कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी की रफ्तार थम सकती है. चिंता की बात यह भी है कि रुपये में कमजोरी की वजह से अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम आदमी की जेब पर भी असर पड़ेगा.बेचारा आम आदमी तो पहले से कराह रहा है .
अर्थशास्त्र के बारे में अपना ज्ञान शून्य तो नहीं लेकिन उतना ही है जितना कि आम आदमी का होता है.इसलिए हमने इस बारे में अपने अर्थशास्त्री शिक्षकों से जानना चाहा.उनका कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर असर पड़ सकता है. मार्च महीने में तीन दिनों की कटौती के बाद यह लगातार 13 दिनों से स्थिर है. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 84 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. कमजोर रुपये से इसका आयात महंगा हो जाएगा. इसके बाद तेल कंपनियां पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ा सकती हैं.
अर्थशास्त्री कहते हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही अगर तेल कंपनियां डीज़ल के दाम बढ़ाती हैं तो महंगाई भी बढ़ेगी. महंगे डीज़ल की वजह से माल ढुलाई में इजाफा होगा. इसके अलावा, भारत में बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. ऐसे में रुपये में गिरावट से खाद्य तेल और दाल महंगे हो जाएंगे.इतना ही नहीं जिन लोगों ने विदेशों में अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन करा रखा है, उनपर भी रुपये की गिरावट से मार पड़ेगी. डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी से उनका खर्च बढ़ जाएगा. पहले की तुलनों में उन्हें विदेश में वस्तुओं और सेवाओं के लिए ज्यादा खर्च बढ़ जाएगा. साथ ही विदेश यात्रा पर भी भारतीयों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.हमरे डॉ मित्तल इस खबर से बेहद चिंतित हैं .उन्होंने ऐजूकेशन लोन ले रखा है.
जानकार बताते हैं कि रूपये में गिरावट से आम आदमी का नुक्सान भले हो लेकिन रुपये में गिरावट से भारतीय आईटी कंपनियों को फायदा होगा. दरसअल, विदेशों में इन कंपनियों की कमाई डॉलर के मद में होती है. इस प्रकार रुपये के मुकाबले मजबूत डॉलर से इन कपंनियों की कमाई बढ़ जाएगी. इसके अलावा निर्यातकों को भी फायदा होगा. दूसरी ओर आयातकों को नुकसान होगा.
जब हम स्नातक कक्षाओं में अर्थशास्त्र पढ़ते थे तब हमें पढ़ाया जाता था कि रुपये की कीमत पूरी तरह से मांग  और आपूर्ति  पर निर्भर करती है. साथ ही, इस पर आयात और निर्यात का भी असर पड़ता है. भारत समेत दुनियाभर के देशों के पास दूसरे देशों की मुद्रा भंडार होती है. इसी की मदद से वे आपस में सौदा करते हैं. इसी विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े आरबीआई द्वारा समय-समय पर जारी किया जाता है.रूपये में आई कमजोरी के लिए हम किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते .इसके लिए कोरोना और कांग्रेस की सरकारें जिम्मेदार होंगी .हमारी सरकार तो उत्सवधर्मी   सरकार है .हमें अपनी सरकार पर गर्व है. रही बात रूपये की तो आज भले ही कमजोर है लेकिन कल उसका मजबूत होना तय है क्योंकि हमारे पास एक मजबूत 56  इंच सीने वाली सरकार है .
@ राकेश अचल

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