सपनों के सच्चे सौदागर थे छत्तीसगढ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी

संतोष तिवारी (रिपोर्टर )

भारतीय राजनीति में एक ऐसी शख्सियत का अन्त हो गया। जो सच में अपने कार्यों से काफी लोगो को प्रभावित किया। जो अपने जुझारूपन और कर्मठता से लोगों के बीच में अलग छाप छोडी। जो कही न कही समाज के पिछडे लोगो का भरपूर नेतृत्व किया। यह भारत का ऐसा राजनेता बनकर राजनीति की जो बिरले ही होते है। आज जिस तरह अधिकतर अंगूठाछाप नेता पढे लिखे अधिकारियों से जी हुजूरी कराते है।

यह नेता एक दम अलग छाप छोडा भारतीय राजनीति में। बात हो रही है छत्तीसगढ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जिनका शुक्रवार को इलाज के दौरान निधन हो गया। अजीत जोगी प्रशासनिक सेवा से लेकर सियासत तक का सफर पूरा किया। और एक अपनी अलग पहचान छोडी। उनकी छवि एक जुझारू नेता की रही। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहले मुख्यमंत्री बने थे अजीत जोगी वर्ष 2000 से लेकर 2003 के बीच संभाली थी छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री की कुर्सी। एक अफसर से जुझारू नेता बनने तक के सफर में जोगी ने कई उतार चढाव देखे लेकिन हार कभी न मानी। जब मध्यप्रदेश से अलग होकर 2000 में छत्तीसगढ अलग राज्य बना।

जिसकी पहली कमान अजीत जोगी के हाथ में रही। क्योकि जब नये राज्य का सृजन हुआ तो राजनीतिक गलियारे में जोगी की काफी चर्चा रही। और सभी नेता यह जानते थे कि अजीत जोगी की भूमिका किसी भी कीमत पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। और अजीत जोगी वर्ष 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर सेवारत रहे। राज्य के चुनाव के अलावा वह संसद के दोनों सदनों का भी हिस्सा रहे। साल 2000 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। और इस दौरान अजीत जोगी का वक्तव्य, मैं सपनों का सौदागर हूं।

मैं सपने बेचता हूं’। काफी चर्चा में रहा। अजीत जोगी की दो प्रसिद्ध किताबें ‘रोल ऑफ डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर’ और ‘एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ पेरिफेरल एरियाज’ काफी प्रसिद्ध है। अजीत जोगी 1986 से 1998 के बीच दो बार राज्‍यसभा के सांसद रहे। साल 1998 में वे रायगढ़ से सांसद चुने गए और 1998 से 2000 के बीच कांग्रेस पार्टी के प्रवक्‍ता भी रहे। छत्तीसगढ़ राज्‍य बनने के बाद वे साल 2000 से 2003 के बीच राज्‍य के पहले मुख्‍यमंत्री रहे। साल 2004 से 2008 के बीच जोगी 14वीं लोकसभा के सांसद रहे। साल 2008 में मरवाही विधानसभा सीट से चुन कर विधानसभा पहुंचे।

साल 2009 के लोकसभा चुनावों में चुने जाने के बाद जोगी ने लोकसभा सदस्य छत्तीसगढ़ के महासामुंद निर्वाचन क्षेत्र के रूप में काम किया। हालांकि वह 2014 के लोकसभा चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखने में असफल रहे। कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद अजीत जोगी ने साल 2016 में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी नाम से अपनी नई पार्टी बनाई थी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में 2016 तक दो ही मुख्य पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी थी और जमीनी पकड़ रखने वाली कोई क्षेत्रीय पार्टी मौजूद नहीं थी।

अजीत जोगी ने जनता को यही विकल्प देने के लिए अपनी पार्टी का गठन किया था। अजीत जोगी पहले एक इंजीनियर थे, फिर प्रशासनिक अधिकारी और फिर राजनेता के तौर पर काम करते हुए छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। 1946 में अजीत जोगी का जन्म बिलासपुर के एक छोटे से गाँव मरवाही में हुआ था। लेकिन अपनी मेहनत और लगन से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।फिर कुछ दिन तक एनआईटी रायपुर में लेक्चरर के रूप में काम किया। इसके बाद आईपीएस बने और अगले ही साल फिर से परीक्षा दे कर आईएएस बन गए। आईएएस बनने के बाद 1981-85 तक इंदोर जैसे महत्वपूर्ण जिले में कलेक्टर भी रहे। यदि राजनीति की बात की जाये तो कांग्रेस में काफी पकड रही अजीत जोगी की।

हालांकि अजीत जोगी अर्जुन सिंह की सुझाव से आए राजनीति में उसी दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सुझाव से राजनीति में आए और कांग्रेस पार्टी से जुड़ गए। 1986-1998 तक दो बार राज्य सभा के सदस्य रहे। इससे पूर्व एआईसीसी के अनुसूचित जाति- जनजाति विभाग का सदस्य भी बनाया गया था। सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले अजीत जोगी को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी में कई दिग्गजों के बावजूद महामंत्री भी बनाया गया था। समय समय पर उनको कई राज्यों का चुनाव प्रभारी भी बनाया गया।1996 में उन्हें महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देते हुए एआईसीसी के कोर ग्रुप का सदस्य नियुक्त किया गया। सोनिया गांधी के करीबी होने की वजह से अजीत जोगी लगातार राजनीति के शिखर पर बढ़ते जा रहे थे। 1997 मे दिल्ली चुनाव होना था और उसी वक़्त उन्हें चुनाव प्रभारी बनाया गया। इसके बाद 1998 में बीजेपी के क़द्दावर नेता नंदकुमार साय को रायगढ़ लोक सभा में पटखनी दी।इसके बाद उनका क़द दिन ब दिन और बढ़ता चला गया।

1998-2000 तक एआईसीसी के प्रवक्ता के रूप मे महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी को बेहतरीन ढंग से निभाया साथ ही वो लगातार सोनिया गांधी के और क़रीब आते गए। जब छत्तीसगढ़ का पहला सीएम चुना जाना था। अजीत जोगी केन्द्रीय सियासत की बुलंदियों पर थे। सोनिया गांधी के भरोसंद नेताओं में उनको शुमार किया जाता था। इसका फ़ायदा उन्हें सबसे ज़्यादा उस वक़्त हुआ जब मध्यप्रदेश से अलग हो कर छत्तीसगढ़ अलग राज्य के रूप मे अस्तित्व में आया।

विद्याचरन शुक्ला जैसे अनुभवी और बड़े नेताओं के लाख कोशिश के बावजूद अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बन गए। 2000-2003 तक अजीत जोगी मुख्यमंत्री के पद पर बने रहे। लेकिन 2004 का चुनाव कांग्रेस और अजीत जोगी दोनों के लिए ही बुरी खबर के कर आया। कांग्रेस चुनाव हार चुकी थी और अब छत्तीसगढ़ मे बीजेपी की सरकार थी। रमन सिंह के नेतृत्व मे बीजेपी ने पंद्रह साल तक छत्तीसगढ़ में राज किया था।