बनारासी साड़ी के कारीगर तैयार कर रहे हैं पीपीई किट डीआरडीओ ने दी मंजूरी

बनारासी- साड़ी- के- कारीगर- तैयार कर रहे हैं पीपीई किट -डीआरडीओ- ने -दी- मंजूरी--
संक्रमण को देखते हुए शासन व प्रशासन के साथ जनता भी अब युद्ध स्तर पर कोरोना को हराने में जुट गई है। कोरोना संक्रमण से लड़ रहे हमारे फ्रंट वॉरियर डॉक्टरों को भी इस वक्त इस संक्रमण से लड़ते हुए खुद को बचाने कि लए पीपीई किट की जरुरत पड़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में पीपीई किट का उत्पादन तेजी से शुरु हो गया है।

स्वतंत्र प्रभात वाराणसी

मनीष पांडेय

देश में लगातार फैलते कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन व प्रशासन के साथ जनता भी अब युद्ध स्तर पर कोरोना को हराने में जुट गई है। कोरोना संक्रमण से लड़ रहे हमारे फ्रंट वॉरियर डॉक्टरों को भी इस वक्त इस संक्रमण से लड़ते हुए खुद को बचाने कि लए पीपीई किट की जरुरत पड़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में पीपीई किट का उत्पादन तेजी से शुरु हो गया है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान की इसी कड़ी में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पूर्वांचल की पहली डीआरडीओ और शिप्रा से अप्रूव्ड पीपीई किट बनाने का उत्पादन इकाई फैक्ट्री की शुरुआत हो गई है। इस फैक्ट्री में वाराणसी के साड़ी उत्पादन से जुड़े लोगों द्वारा पीपीई किट तैयार कराया जा रहा है, जहां हर महीने 5 हजार पीपीई किट तैयार कर पूर्वांचल सहित आस-पास के अन्य जिलों में कम दामों में उपलब्ध कराया जाएगा इस सम्बन्ध में वाराणसी इंडस्ट्री के जॉइंट कमिश्नर उमेश कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी जब देश में फैलना शुरु हुआ तो इस महामारी से लड़ने के लिए सबसे बड़ी संकट सबसे पहले हमारे कोरोना योद्धाओं के लिए पीपीई किट की आवश्यकता पड़ी, जिसके लिए हम दूसरे देश पर निर्भर कर रहे थें, लेकिन पीएम के आत्मनिर्भर अभियान से आज हम पीपीई किट निर्यात करने की स्थिति में पुहंच गए हैं। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल का वाराणसी में पीपीई किट की यह पहली इकाई है।

उन्होंने बताया कि यह कारखाना डीआरडीओ (DRDO) और शिप्रा (SIPRA) द्वारा अप्रूव है। इसका उत्पादन आरंभ हो गया है, और यह कारखाना हर महीने लगभग 5 हज़ार पीपीई (PPE KIT) किट तैयार करेगाऔर धीरे-धीरे उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाएगी। यह चिकित्सा उपकरण है। इसलिए इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा साथ ही सरकार के पूरे मानक का ध्यान रखा जाएगा। यहीं वजह थी कि इसको बनाने के पहले डीआरडीओ और शिप्रा दोनों जगहों से अप्रूवल सर्टिफिकेट लेना पड़ा, इसलिए देरी हुई। हम लोग पूर्वांचल में इसलिए प्रयासरत थे। ताकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्र में इसकी सप्लाई हो सके।

जॉइंट कमिश्नर उमेश कुमार ने बताया कि इस पीपीई किट को हम लोग गवर्नमेंट के ई-मार्केट में रजिस्टर्ड कराएंगे। इसके अलावा आयुष्मान भारत के रजिस्टर हॉस्पिटलों में इसकी सप्लाई की जाएगी, ताकि कम पैसे में उच्च क्वालिटी का उत्पादन सभी नर्सिंग होम में जा सकें। आगे चलकर गवर्नमेंट के अनुसार इस पीपीई किट को बाहर निर्यात भी किया जाएगा क्योंकि भदोही और वाराणसी निर्यात के लिए जाना जाता है, इसलिए इसका आर्डर मिलने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जॉइंट कमिश्नर उमेश कुमार ने सभी कारीगरों को देश के लिए पीपीई किट बनाने के लिए बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद दिया।

पीपीई किट बनाने वाले फैक्ट्री मालिक गोविंद अग्रवाल ने बताया कि हम लोग को 2 महीने पहले विचार आया कि जैसे हम साड़ी और सूट बनाते हैं। उसी तरह प्रशासन और सरकार के सहयोग से पीपीई किट का निर्माण किया जाए। उसके बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। गोविंद अग्रवाल ने बताया कि डीआरडीओ में हम लोगों ने 7 सैंपल भेजे थें और डीआरडीओ से सातों सैंपल को अप्रूवल मिल गया। उसके बाद शिप्रा से भी अप्रूवल मिलने के बाद हम लोग पीपीई किट बना रहे हैं। रोज 200 से 300 पीपीई किट बनाने का लक्ष्य है आगे और बढ़ाएंगे और पूरी कोशिश है कि 500 रुपए के अंदर पीपीई किट तैयार हो जाए

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