चीन से सुरक्षा को कुशीनगर में रखा गया है तिब्बती तंत्र व सूत्र, स्तूप में सुरक्षित है तिब्बती धरोहर

चीन से सुरक्षा को कुशीनगर में रखा गया है तिब्बती तंत्र व सूत्र, स्तूप में सुरक्षित है तिब्बती धरोहर

चीन से सुरक्षा को कुशीनगर में रखा गया है तिब्बती तंत्र व सूत्र, स्तूप में सुरक्षित है


गोरखपुर । भारत व तिब्बती के मैत्री संबंध के साथ विश्वास की भी मजबूत डोर भी बंधी हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केंद्र कुशीनगर के तिब्बती बुद्ध मंदिर स्थित बोधिसत्व स्तूप व शा-खङ्ग में तिब्बत से लाया गया हस्तलिखित तंत्र व सूत्र की प्रति यहां आज भी सुरक्षित है।

चीन से सुरक्षा को कुशीनगर में रखा गया है तिब्बती तंत्र व सूत्र, स्तूप में सुरक्षित है तिब्बती धरोहरकुशीनगर में तिब्बती मंदिर परिसर में बोधिसत्व स्तूप।  भारत व तिब्बती के मैत्री संबंध के साथ विश्वास की भी मजबूत डोर भी बंधी हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केंद्र कुशीनगर के तिब्बती बुद्ध मंदिर स्थित बोधिसत्व स्तूप व शा-खङ्ग में तिब्बत के ल्हासा से लाया गया प्राचीन हस्तलिखित तंत्र व सूत्र की एक प्रति यहां आज भी सुरक्षित है। चीन से सुरक्षा को लेकर तिब्बतियों ने इसे यहां लाकर रखा है।

दलाई लामा कर चुके हैं पूजा

तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा भी यहां आकर इसकी पूजा कर चुके हैं। यहां आने वाले तिब्बती बौद्ध श्रद्धालु इसकी श्रद्धापूर्वक पूजा कर अपने को धन्य समझते हैं। चीन ने जब 1959 में तिब्बत पर अधिकार किया था, उस समय दलाई लामा सहित तमाम लामा व तिब्बती लोगों ने भारत में आकर शरण ली थी। तिब्बत की राजधानी ल्हासा के मठ में सुरक्षित हस्तलिखित बोधिसत्व मंत्र व सूत्र की प्रतियों को उसी समय तिब्बती लोगों ने इसे लाकर सुरक्षा की दृष्टि से धर्मशाला (हिमांचल प्रदेश) में रखा।

दलाई लामा की इच्‍छा से 1967 कुशीनगर लाई गई तंत्र की एक प्रति

दलाई लामा की इच्छा पर 1967 में एक प्रति कुशीनगर में स्तूप बनाकर रखी गई। तिब्बतियों का मानना है कि धार्मिक रूप से अति महत्वपूर्ण यह सूत्र भारत में ही पूर तरह से सुरक्षित रह सकता है। जब चीन ने देश पर कब्जा किया था, तब इसके नष्ट किए जाने की संभावना खड़ी थी। इसके बाद दलाई लामा 1995 में बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर आए और विधि विधान पूर्वक स्तूप की पूजा की।

महायान बौद्ध परंपरा में इसका विशेष महत्व

तिब्बत की महायान बौद्ध परंपरा में बोधिसत्व तंत्र व सूत्र की बड़ी महत्ता है। ऐसी मान्यता है कि इसका पाठ करने से मनुष्य को बोधिसत्व की प्राप्ति हो सकती है। यहां आने वाले तिब्बती श्रद्धालु बोधिसत्व स्तूप व शा-खङ्ग की श्रद्धा पूर्वक पूजा करते हैं।
तिब्बती बुद्ध मंदिर कुशीनगर के प्रबंधक लामा टेंकयोंग बताते हैं कि बोधिसत्व स्तूप के निकट शा-खङ्ग में 1959 में तिब्बत से लाया गया हस्तलिखित तिब्बती तंत्र व सूत्र की एक प्रति मूल रूप में सुरक्षित रखी गई है। यह 18 वीं सदी में लिखा गया था। यह तिब्बत की सबसे बड़ी धार्मिक धरोहर है।

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