दीपावली पर बढ़ती महँगाई की मार के आगे आम आदमी त्रस्त, दीपावली का त्योहार हुआ फीका

दीपावली पर बढ़ती महँगाई की मार के आगे आम आदमी त्रस्त, दीपावली का त्योहार हुआ फीका

कारण एक तो कोविड का प्रकोप ऊपर से बढ़ती महंगाई का होना मान रहे है । 


  स्वतंत्र प्रभात 
 


जिला संवाददाता


विनीत कुमार मिश्रा

मोहनलालगंज/लखनऊ । दीपावली के त्योहार पर बढ़ती महँगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है । इस बार दीपावली का    त्योहार इतना फीका नजर आया कि बाजार गुलजार तो हुए लोगो का हुजूम भी खरीददारी करने बाजार पहुँचा वही धनतेरस के पर्व पर ब्यापारियों के मुताबिक जैसी उन्हें उम्मीद थी वैसी दुकानदारी नही हुई । जिसका कही न कही कारण एक तो कोविड का प्रकोप ऊपर से बढ़ती महंगाई का होना मान रहे है । 

वहीं कपड़ो की दुकानों से लेकर बर्तन भंडार की दुकानों व सर्राफ की दुकानों पर भी लोग पहुचे लेकिन बढ़े भाव के कारण हल्की फुल्की खरीददारी करके चले गए । मिष्ठानो की दुकानों पर भी बढ़ती महँगाई का असर साफ तौर पर देखने को मिला वही चुरा खुटिया सहित हरी सब्जियों के उछले दामो ने लोगो की जेब ढीली कर दी 

और लोग रोज मर्रा के प्रयोग की आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी कर अपने अपने घरो को लौट गए और जनता की माने तो हर आदमी के मुँह से कमर तोड़ मंहगाई की आवाज सुनाई दी वही मध्यमवर्गीय व गरीब परिवारों के लोग बाजारों में पहुचे लेकिन मंहगाई की मार के

 आगे जरूरत की वस्तुएं खरीद मन मसोस कर रह गये । क्योकि अभी बड़े किसानों की फसलो को छोड़कर छोटे किसानों की धान की फसल खेतो में ही खड़ी है और कुछ किसान ही फसल काटकर घरो तक पहुचा सके है लेकिन धान की खरीद की शुरुआत न होने के कारण उन्हें सरकारी काटा लगने व शुरुआत होने की प्रतीक्षा है । 

वहीं किसानों  की माने तो कमर तोड़ मंहगाई में परिवार चलाने में पसीने छूट रहे हैं त्योहार अलग से है । अब ऐसी सूरत में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया वाली कहावत चरितार्थ हो रही है ।

वहीं किसान अलग परेशान व हैरान है और आम जनमानस अलग अब बढ़ती महंगाई पर विराम कब और कैसे लग सकेगा ये बात आने वाला वक्त बताएगा ।
 

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