भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी शहरी पीएम आवास योजना 

भ्रष्ट सर्वेयरोऔर डीसी विनय श्रीवास्तव की ताल पर थिरकते नजर आ रहे परियोजना अधिकारी डूडा 

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी शहरी पीएम आवास योजना 

गोला गोकर्णनाथ के तीर्थ मोहल्ला में आवास लाभार्थी रहता ही नहीं और बगैर आवास बने ही पैसा का हो गया बंदर बांट 

लखीमपुर में शिव कॉलोनी तथा अन्य जगहों पर कई आवास बनवाए बगैर ही पैसा कर लिया गया हजम आवास का अता पता नहीं
परियोजना अधिकारी डूडा जांच करने की बजाय शिकायती प्रार्थना पत्रों को ही करवा रहे गायब
 
 
लखीमपुर खीरी भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना शहरी पीएम आवास योजना परियोजना अधिकारी समेत डीसी सर्वेयर की कमाई का जरिया बनकर रह गई है ।पीएम शहरी आवास योजना में प्रति आवास आम रेट 20000 से ₹30000 प्रति आवास की दर से की गई वसूली से जहां जिम्मेदार अल्प समय में लाखों और करोड़ों के स्वामी बन गए। पैसा लेकर पात्रों और साधन संपन्न रिश्तेदारों को आवास का लाभ देने के साथ-साथ लगभग दो सौ से 250 प्रधानमंत्री आवास आउट ऑफ यु एल बी दिए गए हैं। धनवल की दम पर सभी में भ्रामक एवं फर्जी जांच रिपोर्ट लगा दी गई है ।जिसकी फर्जी एवं भ्रामक होने की पुष्टि सत्यापन में होगी। इतना ही नहीं दर्जनों ऐसे आवास हैं जिनका कहीं भी अता-पता नहीं है। कि यह कहां बने हैं? बने हैं अथवा नहीं बने हैं? आवास लाभार्थी का कोई अता पता नहीं लेकिन फर्जी जिओ टेक करके पैसे का बंदर बात कर लिया गया।
 
लेकिन जिओ टैग करने वाले सर्वेयर व डीसी को भी यह नहीं मालूम है कि आवास कहां बने हैं ?और आवास लाभार्थी कहां रहते हैं? सारा फर्जीवाडा परियोजना अधिकारी डूडा के संरक्षण में किए जाने की चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसका जीता जागता उदाहरण गोला गोकर्णनाथ के तीर्थ मोहल्ला में देखा जा सकता है ।जहां पर आवास की लाभार्थीनी को आवास दिया गया तीनों जियोटेक भी हुआ भुगतान भी निकालकर बंदरवाट कर लिया गया पर आज तक आवास लाभार्थी का आता-पता किसी को नहीं है ।कहां रहती है और आवास कहां बना है ?क्या परियोजना अधिकारी डूडा जियो टैग करने वाले सर्वयरों से जानकारी लेकर बताएंगे कि उक्त आवास लाभार्थी कहां रहती तथा इसका आवास कहां बना है? 
 
 
फिर सामने आया आवास के नाम पर 35000 रुपए लिए जाने का मामला
शहरी पीएम आवास योजना में कायम दलालों का साम्राज्य और अवैध वसूली का खेल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में एक नया मामला फिर खुलकर सामने आया है जो परियोजना अधिकारी की कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी की पोल खोलने को काफी है ।मामला शिव कॉलोनी निवासी आवास लाभार्थी ने गीता चौरसिया से जुड़ा है जहां पर गीता चौरसिया को आवास का लाभ देने के नाम पर एक चर्चितकथित दलाल जिसका नाम मनोज कुमार शुक्ला बताया जाता है
 
द्वारा₹35000 की अवैध वसूली किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना है और यह खेल जिम्मेदारों के संरक्षण में खेले जाने का बताया जाता है ।सूत्रों का कहना है आवास के नाम पर अवैध वसूली के खेल की पूरी जानकारी परियोजना अधिकारी को है लेकिन वह इस पर लगाम लगा पाने में पूरी तरह से सफल दिखाई पड़ रहे हैं। परियोजना अधिकारी डूडा पर अवैध वसूली करने वालों को संरक्षण देने के आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
 
आवासों का अता पता नहीं और पैसा निकलकर हजम 
जनपद लखीमपुर खीरी में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए भ्रष्टाचार की बात करें तो शायद यह अब तक का जिले का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित होगा ।यदि इसकी उच्च स्तरीय जांच टीम गठित कर संपूर्ण जनपद में दिए गए शहरी आवासों की करा ली जाए जांच और कराया जाए स्थलीय सत्यापन तो कई करोड़ रुपए के घोटाले का पर्दाफास होना होगा तय। कागजों पर आवास बने दिखाकर दरजऩो आवासौ का पैसा आपस में बांट लिया गया। सूत्र बताते हैं इसमें परियोजना अधिकारी डूडा से लेकर सी एल टीसी ,डीसी व सर्वेयरो तक पैसा जाने के चलते आज तक जांच नहीं कराई जा रही है। यदि हम बतौर बानगी की बात करें तो नगर पालिका परिषद लखीमपुर के अंतर्गत चार-पांच ऐसे आवास हैं जो आज तक बने ही नहीं है पैसा निकाल कर हजम कर लिया गया ।वहीं गोला में मोहल्ला तीर्थ में एक आवास ऐसा दिया गया है वहां लाभार्थी कभी रहता ही नहीं है। कागज पर फर्जी तरीके से आवास दिखाकर आवास का पैसा डकार गया है। ऐसा सूत्रों का आरोप है। 
 
भीरा सभासदों ने डिप्टी सीएम से की डीसी विनय श्रीवास्तव की अवैध वसूली की शिकायत के बाद भी नहीं कराई गई जांच और कार्यवाही।
गत माहपूर्व नवगठित नगर पंचायत भीरा र के नवनिर्वाचित आधा दर्जन सभासदों द्वारा डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के आवास पर जाकर पीएम आवास शहरी योजना में प्रति आवास ₹30000 की अवैध वसूली के आरोप लगाए थे ।और मामले की जांच करवा कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी ।डिप्टी सीएम को दिए गए शिकायती पत्र में सभासदों ने डीसी अरिनेम कंपनी विनय श्रीवास्तव पर प्रति आवास ₹30000 की अवैध वसूली करने का आरोप लगाने के साथ-साथ पैसा ना दे पाने वाले लाभार्थियों की दूसरी किस्त में आपत्ति दिखाकर किस्त रोक दिए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए गए थे।
 
लेकिन परियोजना अधिकारी की हठधर्मिता के आगे आज तक जांच नहीं कराई गई। शायद परियोजना अधिकारी डूडा के सामने डिप्टी सीएम कोई मायने ही ना रखते हो जो उच्च अधिकारियों के यहां से आने वाले शिकायती पत्रों की जांच कराने की वजाय उनको रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता है। शीघ्र ही लोकायुक्त उत्तर प्रदेश के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की बात प्रकाश में आई है। शिकायतकर्ता विशाल पांडे ने उक्त मामले में शासन प्रशासन को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र की शासन व प्रशासन एवं शपथ पत्र के साथ शिकायत कर  मामलों के दोषी लोगों पर कार्यवाही की मांग करने की बात मीडिया में कही है।

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