मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए होता है अमृत

जनपद में कार्यशाला का हुआ आयोजन अमेठी। 6 अगस्त, विश्व स्तनपान सप्ताह को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित सभागार में जनपद के समस्त बीपीएम,एचईओ,एपीओ एवं बीसीपीएम की मौजूदगी में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीपीएम बसंतराय ने कहा कि जन्म के बाद पहला घंटा शिशु और मां दोनों के

जनपद में कार्यशाला का हुआ आयोजन 


अमेठी। 6 अगस्त, विश्व स्तनपान सप्ताह को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित सभागार में जनपद के समस्त बीपीएम,एचईओ,एपीओ एवं बीसीपीएम की मौजूदगी में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीपीएम बसंतराय ने कहा कि जन्म के बाद पहला घंटा शिशु और मां दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

मां के दूध में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो बच्चे के जीवन के लिए अमूल्य हैं। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए अमृत है, जो नवजात शिशु को रोगों और संक्रमण से बचाता है। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने से शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। स्तनपान से शिशु का समुचित विकास होता है मां की त्वचा का स्म्पर्क शिुशु के तापमान को बनाये रखता है।

पहला गाढा दूध या कोलोस्ट्राल शिशु को होने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाता है। इसके अलावा दस्त रोग निमोनिया कान व गले संक्रमध आदि का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। डीएचईओ शालू गुप्ता ने बताया कि स्तन पान से मां को प्रसवोपरान्त अत्याधिक रक्तश्राव का खतरा कम हो जाता है।

यदि मां कोविड से संक्रमित है या उसकी संभावना है तब भी मां शिशु को स्तनपान करा सकती है।  इसके अलावा यदि बच्चा बीमार है और वह कोविड से संक्रमित है तो भी मां अवश्य शिशु को स्तन पान करा सकती है। स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक लगाव को बढ़ाता है।

स्तनपान कराने से महिलाओं में स्तन और डिम्बग्रंथी के कैंसर व एनीमिया होने की आशंका भी कम हो जाती है।एसीएमओ आरसीएच डा नवीन कुमार मिश्रा  ने कहा कि बच्चे का स्वास्थ्य मां की जागरूकता से जुड़ा होता है, इस लिए मां का जागरूक होना बहुत जरूरी है।स्तनपान कराते समय सावधानियो भी रखनी होगी अगर मां को बुखर खांसी या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरन्त चिकित्सक से सम्पर्क करे। खांसते और छीेकते समय अपने मुह पर रूमाल अवश्य रखे। 

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