शिवराज के साझेदारों से बिन बंटवारे के जमीन पर चौकी इंचार्ज ने दिलवाया कब्जा

शिवराज के साझेदारों से बिन बंटवारे के जमीन पर चौकी इंचार्ज ने दिलवाया कब्जा

साहब! हमारा पुश्तैनी जमीन है इस पर कोई कैसे कर सकता है कब्जा लखनऊ साझेदारों से बिन बंटवारे के जमीन पर एसडीएम का आदेश बताकर मटियारी चौकी के मार्फत रसूखदारो ने पीड़ित के जमीन पर किया कब्जा. मटियारी के स्थानीय लोगों ने सुबह उठते ही पीले पंजे का देखा कहर. पुलिस बल के साथ मटियारी

साहब! हमारा पुश्तैनी जमीन है इस पर कोई कैसे कर सकता है कब्जा

लखनऊ

साझेदारों से बिन बंटवारे के जमीन पर एसडीएम का आदेश बताकर मटियारी चौकी के मार्फत रसूखदारो ने पीड़ित के जमीन पर किया कब्जा.

मटियारी के स्थानीय लोगों ने सुबह उठते ही पीले पंजे का देखा कहर. पुलिस बल के साथ मटियारी चौकी इंचार्ज अपने बाबा मोड़ चौराहे पर जेसीबी लेकर पहुंचे और पीड़ित शिवराज के साझेदारों के बिना बंटवारे वाले जमीन पर एसडीएम का आदेश बताकर बाबा हॉस्पिटल मोड़ पर स्थित गाटा संख्या 104, 105 पर स्थित जमीन पर दस बारह हरे पेड़ हटाने के साथ कब्जा दिलवाना शुरू कर दिया. पीड़ित शिवराज बताते हैं कि इस जमीन पर पिछले 10 वर्षों से हमारे साझेदारों से बंटवारे के निपटारे का मामला और पिछले कुछ महीनों से केस चल रहा है.

शिवराज के साझेदारों से बिन बंटवारे के जमीन पर चौकी इंचार्ज ने दिलवाया कब्जा

वहीं पीड़ित का कहना है कि आपसी बंटवारे के बगैर आखिर हमारी जमीन पर एसडीएम या पुलिस बल कब्जा कैसे दिलवा सकती है. शिवराज बताते हैं कि मुकदमा संख्या 2434/ 2019 मामला कोर्ट में पेंडिंग है जब तक उसका आदेश नहीं हो जाता तब तक आखिर चौकी इंचार्ज जेसीबी लेकर एसडीएम का हवाला देते हुए दूसरे पार्टी को कब्जा कैसे दिलवा सकते हैं. अगर एसडीएम साहब ने आदेश किया था तो मौके पर राजस्व विभाग के अधिकारी क्यों नहीं मौजूद थे. इसके साथ ही पीड़ित शिवराज ने यह भी कहा कि जब चौकी इंचार्ज नापी की बात  कह पल्ला झाड़ रहे हैं तो वह यह भी बताएं कि क्या पीड़ित पक्ष के लोगों को सूचना दिया गया था. 


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवराज और उनके परिवार का लगभग 13000 स्क्वायर फुट जमीन नक्शे पर मौजूद है जबकि मौजूदा स्थिति में 8000 स्क्वायर फुट से ज्यादा जमीन वर्तमान समय में नहीं दिख रहा है इसमें से पुलिस बल 3200 स्क्वायर फुट कब्जा दिलाने के लिए मौजूद थी. जबकि जमीन के मालिक शिवराज पुत्र बिंद्रा और इनके परिवार के लोग जमीन को लेकर कुछ दिनों से मुकदमा कोर्ट में कर रखे हैं जिसका अभी तक निपटारा नहीं हुआ है. स्थानीय लोगों ने भी कहा कि शिवराज और अन्य 10 लोगों की साझा जमीन है.

जबकि इस जमीन को दुर्ग विजय देवकी रामकरण रामेश्वर आदि लोगों ने चिनहट थाने में पूर्व एसएसआई ओंकार नाथ यादव की पत्नी विनीता यादव को बेच दिया था. स्थानीय लोगों ने कहा कि जब परिवार का आपसी बटवारा नहीं हुआ तो जमीन बेचने का हक आखिर इन लोगों को दिया किसने ?

शिवराज के साझेदारों से बिन बंटवारे के जमीन पर चौकी इंचार्ज ने दिलवाया कब्जा

सूत्र बताते हैं कि अभी बारिश के दिनों से पहले तक शिवराज और उनके परिवार की गाय भैंसे उसी जमीन पर पेड़ के नीचे बांधे जा रहे थे यह जमीन पीड़ित शिवराज के परिवार की पुश्तैनी जमीन है. अब देखना यह होगा कि शिवराज तथा उनके पीड़ित परिवार को न्याय राजस्व विभाग, व थाना चिनहट किस प्रकार दिलवाती हैं या यूं ही शिवराज और उनका परिवार  अपनी पुश्तैनी जमीन के लिए धक्के खाते रहेंगे. 

क्या कहा चिनहट थाना प्रभारी ने

जब इस बारे में चिनहट थाने के प्रभारी सचिन सिंह से बात की गई तो मालूम चला कि समाधान दिवस पर राजस्व टीम ने नापी कराने के साथ कब्जा दिलवाने का आदेश दिया था इस मामले में कोई मुकदमा कोर्ट में  है इसकी जानकारी किसी को नहीं है अगर ऐसा है

तो राजस्व टीम ने आदेश क्यों दिया होता. वही मौके पर मौजूद चौकी इंचार्ज से बात की गई तो बताया गया कि इस जमीन के नापी करवाने के साथ एसडीएम सदर का कब्जा दिलवाने का आदेश हुआ है इस वजह से इसमें हम कुछ नहीं कर सकते. 

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