एनटीपीसी रिहंद महारत्न कम्पनी की राख से घिरा बीजपुर,ग्रामिणों की सांसों पर संकट
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा, विकास के बदले में मिली राख
संतोष कुमार गुप्ता ( संवाददाता)
बीजपुर / सोनभद्र -
एनटीपीसी के रिहंद परियोजना क्षेत्र में उड़ती राख (फ्लाई ऐश) अब स्थानीय ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। बीजपुर और आसपास के गांवों में हालात इतने गंभीर हैं कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है।

ताज़ा तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पूरे इलाके में राख की मोटी परत जमी हुई है। सड़कें धूल और राख से पट चुकी हैं, वहीं तेज हवा के साथ उड़ती राख लोगों की सांसों में जहर घोल रही है।
स्वास्थ्य पर असर-
ग्रामिणों का कहना है कि लगातार उड़ती राख के कारण सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन खांसी और दमा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है।
ग्रामिणों का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राख निस्तारण (Ash Disposal) में लापरवाही बरती जा रही है। पानी का छिड़काव और रोकथाम के उपाय या तो नाकाफी हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
पर्यावरण पर खतरा
राख के कारण खेतों की उपजाऊ क्षमता भी प्रभावित हो रही है। पेड़-पौधे सफेद परत से ढक गए हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर भी खतरा मंडरा रहा है।बीजपुर के ग्रामीणों का दर्द सिर्फ राख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी जमीन और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। जिन लोगों ने कभी विकास के नाम पर अपनी पुश्तैनी जमीन एनटीपीसी लिमटेड एक महारत्न कम्पनी को सौंप दी थी, आज वही जमीन राख के ढेर में तब्दील होकर उन्हें वापस मिल रही है।
जमीन दी थी विकास के लिए, बदले में मिली राख
ग्रामिणों का कहना है कि जब एनटीपीसी परियोजना आई थी, तब रोजगार, सुविधाएं और बेहतर जीवन का वादा किया गया था। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि—खेती योग्य जमीन राख से बंजर हो गई
पानी और हवा दोनों प्रदूषित हो गए, रोजगार के अवसर भी सीमित रह गए, किसानों की टूटी उम्मीदें।
कई किसानों का कहना है कि जिस जमीन पर कभी अनाज उगता था, आज वहां सिर्फ राख उड़ रही है। इससे उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
प्रशासन से सबसे बड़ा सवाल क्या विकास की कीमत बीजपुर के ग्रामीणों को अपनी सेहत और जमीन गंवाकर चुकानी पड़ेगी, या फिर जिम्मेदार एजेंसियां इस संकट का स्थायी समाधान निकालेंगी?


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