राजनीति
धाकड़ अधिवक्ता रवि भूषण चौबे की बेटी रीतिका भी कठिन परिश्रम के साथ बनी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता
यह कहानी सिर्फ एक बेटी की नहीं, बल्कि संघर्ष संकल्प और सपनों की जीत की कहानी है—रीतिका से एडवोकेट रीतिका बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा, संघर्ष से सफलता तक: एडवोकेट रीतिका की गौरवगाथा
बिहार के बक्सर ज़िले की प्रतिभाशाली बेटी रीतिका ने अपने अथक परिश्रम, अटूट विश्वास और परिवार के मजबूत सहयोग से आज एक नई पहचान स्थापित की है—एडवोकेट रीतिका के रूप में।उनके पिता रवि भूषण चौबे जो कि सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता होने के साथ-साथ Ravi Babita Support Foundation के संस्थापक हैं एवं निदेशक हैं, और माता श्रीमती बबीता कुमारी चौबे जो एक समाजसेवी एवं उसी संस्था की निदेशक है दोनों ने सदैव अपनी बेटी को न्याय के क्षेत्र में ऊँचाइयों तक पहुँचते देखने का सपना संजोया इस सफर में उनके भाई शिवांग जो B.A. LL.B के छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
और छोटे भाई शौर्य कात्यायन का भरपूर सहयोग रहा परिवार के इस अटूट विश्वास और समर्थन ने रीतिका के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई दिनांक 20 अप्रैल 2026 को, Bar Council of Delhi में नामांकन के पश्चात सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित चैंबर नंबर 108 D-ब्लॉक में एक गौरवपूर्ण क्षण साकार हुआ, जब वरिष्ठ अधिवक्ता भी,पी यादव ने रीतिका को एडवोकेट बैंड पहनाकर न्याय के पथ पर अग्रसर होने का आशीर्वाद प्रदान किया।
वहीं दूसरी तरफ इस शुभ अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित अधिवक्ता मनोज कुमार चौबे , दीपक कुमार चौबे तथा अन्य कई सम्मानित अधिवक्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए रीतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं इस दौरान, चैंबर से लेकर सुप्रीम कोर्ट के Advocates’ Sitting Room और Lounge तक बार-बार शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ जो इस उपलब्धि की गरिमा और उत्साह को और भी बढ़ा रहा था।
आज रीतिका न केवल अपने गृह जनपद बक्सर बिहार का, बल्कि बलजीत नगर नई दिल्ली और सबौली, सोनीपत हरियाणा का नाम भी गर्व से रोशन कर रही हैं। यह उपलब्धि हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखती है अंत में एडवोकेट रीतिका एवं उनके पिता रवि भूषण चौबे ने वरिष्ठ अधिवक्ता बी. पी. यादव अधिवक्ता मनोज कुमार चौधरी तथा सभी सम्मानित अधिवक्ता साथियों और शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। रवि भूषण चौबे एडवोकेट का सम्पूर्ण समाज के माता-पिता व बेटीयां को संदेश जब परिवार का साथ और खुद पर विश्वास हो तो हर बेटीयों का हौसला अफजाई हो सकता है।
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