थाने के सामने से रातों-रात उखाड़ा गया महाराजा मलिहा पासी स्मृति द्वार, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

मलिहाबाद में दिनभर उबाल पर रहा माहौल

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मलिहाबाद, लखनऊ: मलिहाबाद क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। थाने से महज 10 मीटर की दूरी पर स्थापित महाराजा मलिहा पासी स्मृति द्वार को अज्ञात लोगों द्वारा रातों-रात उखाड़कर गायब कर दिया गया। यह घटना उस स्थान पर हुई जहां सुरक्षा के लिहाज से सबसे अधिक सतर्कता अपेक्षित होती है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
 
थाने के सामने से रातों-रात उखाड़ा गया महाराजा मलिहा पासी स्मृति द्वार, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
 
जानकारी के अनुसार यह स्मृति द्वार क्षेत्र की मौजूदा विधायक जयदेवी कौशल द्वारा लगवाया गया था, जो पासी समाज के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। जैसे ही सुबह लोगों को इस द्वार के गायब होने की जानकारी मिली, क्षेत्र में सनसनी फैल गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। घटना से आहत पासी समाज के लोगों में गुस्सा साफ तौर पर दिखाई दिया और उन्होंने तत्काल विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
 
प्रदर्शन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया और पूरे दिन मलिहाबाद का माहौल गरमाया रहा। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और इस घटना की कड़ी निंदा की। सुहेलदेव आर्मी के चीफ योगेश पासी, लाखन आर्मी के चीफ सूरज पासी, ASP पार्टी के आर.के. आदर्श सहित कई प्रमुख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके अलावा बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, आशु किशोर और ब्लॉक प्रमुख मीनू वर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत करने का प्रयास किया और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की।
 
प्रशासन की ओर से इस मामले में सफाई दी गई कि जिस कंपनी ने स्मृति द्वार का निर्माण कराया था, उसका भुगतान अभी तक पूरा नहीं किया गया था। इसी कारण कंपनी ने रात में आकर द्वार को उखाड़ लिया। हालांकि यह दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है। लोगों का कहना है कि यदि भुगतान का मामला था तो इसे कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए था, न कि चोरी-छिपे इस तरह की कार्रवाई की जाती। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील जगह पर बिना किसी अनुमति के इतनी बड़ी संरचना को कैसे हटाया जा सकता है।
 
घटना ने सामाजिक एकजुटता की भी एक मिसाल पेश की, जब ब्राह्मण समाज के शुभम पंडित ने खुलकर पासी समाज के समर्थन में आवाज उठाई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला केवल एक समाज तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि व्यापक स्तर पर लोगों की भावनाएं इससे जुड़ गई हैं। वहीं कुछ अन्य समाज के लोगों द्वारा पहले से इस स्मृति द्वार का विरोध किए जाने की बात भी सामने आई है, जिससे मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है।
 
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पासी समाज के संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक महाराजा मलिहा पासी स्मृति द्वार को पुनः स्थापित नहीं किया जाता और इस घटना के जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
 
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को आश्वासन दिया है कि शाम तक स्मृति द्वार को दोबारा स्थापित कर दिया जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
 
यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि संवेदनशील मुद्दों को समय रहते संभालना कितना आवश्यक है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि वह इस पूरे मामले को किस तरह सुलझाता है और लोगों का भरोसा दोबारा जीत पाता है या नहीं।

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