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उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष ने गो संरक्षण एवं संवर्धन समिति की किया बैठक
गौ संरक्षण व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के दिए निर्देश
अमेठी। प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशील पहल के क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में गौ संरक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के माननीय उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल एवं सदस्य श्री दीपक गोयल ने जिलाधिकारी संजय चौहान तथा पुलिस अधीक्षक सरवणन टी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ जनपद में संचालित व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक के उपरांत उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से मुखातिब होते हुए बताया कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “गो सेवा” को केवल प्रशासनिक दायित्व न मानते हुए मानवीय, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार किया गया है। इसी दृष्टि से प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं समुचित देखभाल के लिए व्यापक और बहुआयामी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं, जहां 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह व्यवस्था न केवल गोवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ बना रही है।
गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं तथा 24×7 निगरानी प्रणाली लागू है, जिससे सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। “मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना” के माध्यम से गो संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है। योजना के अंतर्गत अब तक लाखों गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किए जा चुके हैं। प्रत्येक गोवंश के पालन-पोषण हेतु 50 रुपये प्रतिदिन की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है।
इससे एक ओर गोवंश का संरक्षण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गोपालकों की आय में भी वृद्धि हो रही है। जनपद अमेठी में भी गो संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जनपद में 128 गो-आश्रय स्थल क्रियाशील हैं, जिनमें 27,492 गोवंश का संरक्षण एवं पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 2,747 प्रगतिशील गोपालकों द्वारा सहभागिता योजना के अंतर्गत 3,591 गोवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।
समीक्षा बैठक में गो-आश्रय स्थलों में चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल, छांव एवं चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चारागाह भूमि पर हरे चारे की बुवाई, उसकी सुरक्षा के लिए फेंसिंग की व्यवस्था एवं समुचित रखरखाव की स्थिति का भी बारीकी से आकलन किया गया। उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया कि गौशालाओं से गोबर खाद की खरीद को बढ़ावा दिया जाए, जिससे जैविक खेती को प्रोत्साहन मिले। वहीं वन विभाग को प्रत्येक गौशाला में सहजन, नीम, पीपल एवं बरगद जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों का रोपण कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अंतर्गत गोवंश की सुरक्षा के प्रति पूर्ण प्रतिबंध लागू है। “जीरो टॉलरेंस नीति” के तहत गोवंश संरक्षण से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही भ्रामक प्रचार फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध भी सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
उपाध्यक्ष ने बताया कि आयोग एवं संबंधित अधिकारी नियमित रूप से गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निराश्रित गोवंश की सेवा एवं संरक्षण में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अनिल चतुर्वेदी, अपर निदेशक पशुपालन विभाग अयोध्या मंडल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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