मऊ गांव में हंसवा ड्रेन की पटरी पर खड़े बेशकीमती सरकारी पेड़ों पर वन माफियाओं ने चलाया आरा
बड़ी मात्रा में लकड़ी पहले ही खपाई जा चुकी है
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मोतीगंज मजरे मऊ गांव में हंसवा ड्रेन की पटरी पर खड़े बेशकीमती सरकारी पेड़ों की अवैध कटान का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ड्रेन खुदाई कार्य की आड़ में सक्रिय वन माफियाओं ने शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात दर्जनों हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलाकर उन्हें ठिकाने लगा दिया। सूचना मिलते ही हरकत में आए वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर करीब 45 कुंतल लकड़ी (मोटा बोटा) बरामद कर कब्जे में ले लिया है, जबकि बड़ी मात्रा में लकड़ी पहले ही खपाई जा चुकी है।
आपको बता दें कि, ग्रामीणों के अनुसार, हंसवा ड्रेन के किनारे वर्षों से खड़े जामुन, नीम, सफेदा और गूलर जैसे कीमती पेड़ों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर तेजी से उनकी ढुलाई की गई, ताकि किसी को भनक न लगे। हालांकि सुबह जब पटरी खाली दिखी तो ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई और उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचित किया।
शनिवार को मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जांच के दौरान 45 कुंतल लकड़ी बरामद की। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, करीब 54 कुंतल लकड़ी अमेठी जनपद के सेमरौता कस्बे में एक व्यापारी को बेचे जाने की बात भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।
इस घटना ने वन विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान बिना मिलीभगत के संभव नहीं है। वहीं, पर्यावरण प्रेमियों ने इसे क्षेत्र के हरित संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है।
वन रेंजर नावेद सिद्दीकी ने बताया कि, मामला गंभीर है और विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लकड़ी को कब्जे में ले लिया है। वन माफियाओं की पहचान के लिए जांच तेज कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि, जल्द ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाएगा। फिलहाल, इस घटना के बाद क्षेत्र में वन माफियाओं की सक्रियता को लेकर दहशत का माहौल है और लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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