प्रदेश भर के निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ केंद्र सरकार को ईमेल से पत्र भेजकर शिकायत

अभिभावकों के शोषण पर सख्त कार्रवाई की मांग, महंगी किताबें, यूनिफॉर्म और तय दुकानों से खरीद की बाध्यता पर उठी आवाज, भेजा विस्तृत पत्र

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बलिया। प्रदेश भर के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ और मनमानी व्यवस्था के खिलाफ अब विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल, उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश संगठन महामंत्री जितेंद्र चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी एवं डॉ. सुकांत मजूमदार को ईमेल के माध्यम से विस्तृत पत्र भेजकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
 
अपने पत्र में उन्होंने बताया कि नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में प्रदेश के अधिकांश निजी स्कूल अभिभावकों को एनसीईआरटी की पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। कई मामलों में इन किताबों की कीमतें सामान्य दरों से कई गुना अधिक हैं, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
 
इसके साथ ही, कई विद्यालयों द्वारा पुस्तकों, कॉपियों एवं यूनिफॉर्म की बिक्री स्वयं स्कूल परिसर में ही की जा रही है या कुछ निर्धारित दुकानों से ही खरीदारी करने का दबाव बनाया जा रहा है। यदि अभिभावक अन्यत्र से सामग्री खरीदना चाहें, तो उन्हें विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार की व्यवस्था शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते व्यवसायीकरण और अनुचित लाभ कमाने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।
 
जितेंद्र चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस गंभीर विषय पर तत्काल हस्तक्षेप करते हुए देशभर में स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने एनसीईआरटी पुस्तकों को अनिवार्य करने, किसी विशेष दुकान से खरीदारी की बाध्यता समाप्त करने, तथा पुस्तकों और यूनिफॉर्म की कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस प्रकार की मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई, तो अभिभावकों का आर्थिक शोषण लगातार बढ़ता जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र ठोस कार्रवाई करेगी, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।

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