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विद्युत संविदा कर्मियों का आर-पार की जंग का एलान; आउटसोर्स निगम में शामिल न करने पर 07 मई से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार
........78 हजार संविदा कर्मियों ने उठाई सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन की मांग; मांगों की अनदेखी पर 21 अप्रैल को जिला स्तर पर होगा सत्याग्रह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में कार्यरत लगभग 78,000 संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को 'विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ' की एक महत्वपूर्ण बैठक नरही स्थित केंद्रीय कार्यालय में वरिष्ठ मजदूर नेता आर.एस. राय की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश भर के संविदा कर्मियों को राज्य सरकार द्वारा नवनिर्मित आउटसोर्स निगम में शामिल करने की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद किया गया। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश की बिजली व्यवस्था ठप हो सकती है। आंदोलन की औपचारिक सूचना ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को भी प्रेषित कर दी गई है।
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि संविदा कर्मी वर्तमान में ठेकेदारी प्रथा के तहत भारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। महासंघ के प्रभारी पुनीत राय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यदि संविदा कर्मियों को आउटसोर्स निगम के दायरे से बाहर रखा गया, तो वे विभाग द्वारा सीधे वेतन भुगतान और ईपीएफ (EPF) जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में ठेकेदारों द्वारा कर्मियों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है और बिना किसी ठोस कारण के आए दिन 'मनमानी छंटनी' की जाती है। आउटसोर्स निगम में शामिल होने से कर्मचारियों को न केवल सेवा की स्थिरता और सुरक्षा मिलेगी, बल्कि एक निश्चित सेवा नियमावली के तहत सम्मानजनक वेतन भी सुनिश्चित हो सकेगा।
आंदोलन की रणनीति साझा करते हुए महासंघ के मीडिया प्रभारी और विद्युत मज़दूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विमल चन्द्र पांडेय ने बताया कि प्रथम चरण में 21 अप्रैल 2026 को प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक दिवसीय 'सत्याग्रह' का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि सरकार का रुख सकारात्मक नहीं रहता है, तो 07 मई 2026 को पूरे प्रदेश में एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया जाएगा। महासंघ ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि इस सांकेतिक विरोध के बाद भी संविदा कर्मियों को आउटसोर्स निगम में शामिल नहीं किया गया, तो समस्त 78,000 कर्मचारी हर जनपद में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।
यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों को पूर्णतः स्वीकार नहीं कर लेती। इस महत्वपूर्ण बैठक में महासंघ के 6 घटक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे, जिनमें मुख्य रूप से भोला सिंह कुशवाहा, मोहम्मद कासिफ, मुदस्सिर राजा, भूपेंद्र सिंह, आशीष कुमार, रविंद्र पटेल, राजू अंबेडकर, प्रियांशु सिंह, विनोद श्रीवास्तव, सोहन मौर्य, धनंजय राजभर, प्रमोद कुमार, अमित कुमार भीष्म, संदीप कुमार सिंह, मो. हाशन, राहुल भाटी, अमित खारी, विनोद कुमार, गुलशन चौधरी एवं प्रमोद कुमार सहित अन्य नेता उपस्थित थे। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।
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