मोहनलालगंज मे बैंक ऑफ इंडिया बना अव्यवस्थाओं का केंद्र, एक कैशियर के भरोसे टिका हजारों ग्राहकों का बोझ
.....छह माह से बैंकिंग सेवाएं बेपटरी, घंटों कतार में खड़े होने को मजबूर ग्रामीण; इकलौते कैशियर पर काम का अत्यधिक दबाव
मोहनलालगंज, लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज कस्बे में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा इन दिनों अपनी बदहाली और चरमराती व्यवस्थाओं के कारण क्षेत्रीय जनता के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। पिछले लगभग छह महीनों से इस महत्वपूर्ण शाखा का पूरा बैंकिंग ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। आलम यह है कि हजारों ग्राहकों के लेनदेन की जिम्मेदारी मात्र एक काउंटर के भरोसे छोड़ दी गई है, जिससे बैंक परिसर में हर दिन अफरा-तफरी का माहौल रहता है।
भीषण गर्मी और उमस के बीच, दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले किसान, मजदूर और असहाय बुजुर्ग सुबह से ही बैंक के बाहर लंबी कतारों में लग जाते हैं। एक ही खिड़की होने के कारण काम की गति अत्यंत धीमी है, जिसके चलते लोगों को अपनी ही मेहनत की कमाई निकालने या जमा करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था के कारण न केवल ग्राहकों का समय और श्रम बर्बाद हो रहा है, बल्कि धक्का-मुक्की और कतारों में लगने को लेकर आए दिन बैंक परिसर में तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बनी रहती है।
कर्मचारी पर बढ़ता मानसिक दबाव और सुरक्षा का जोखिम
इस पूरी अव्यवस्था का सबसे त्रासद पहलू यह है कि बैंक के कैशियर मनोज कुमार पिछले छह महीनों से अकेले ही हजारों ट्रांजैक्शन संभाल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अकेले पूरे क्षेत्र का कैश हैंडल करना और दिन के अंत में पाई-पाई का मिलान करना उनके लिए अत्यधिक मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग जैसे संवेदनशील कार्य में एक ही व्यक्ति पर इतना बोझ डालना न केवल उसके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह मानवीय चूक और सुरक्षा की दृष्टि से भी बड़े जोखिम को निमंत्रण दे रहा है।
प्रबंधन की उदासीनता और जनता का आक्रोश
जब इस गंभीर अव्यवस्था पर शाखा प्रबंधक का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने घिसे-पिटे 'स्टाफ की कमी' वाले तर्क का सहारा लेकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया। प्रबंधक ने स्वीकार किया कि कर्मचारियों की कमी है, लेकिन इस संकट के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को औपचारिक रूप से अवगत कराया गया है या नहीं, इस पर उन्होंने कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। बैंक प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये और संवेदनहीनता ने स्थानीय निवासियों के धैर्य का बांध तोड़ दिया है।क्षेत्रीय जनता और व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिरिक्त काउंटर नहीं खोले गए और स्टाफ की कमी को दूर नहीं किया गया, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, मोहनलालगंज की यह शाखा बैंकिंग सेवा के नाम पर ग्राहकों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
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