आशीष शुक्ला का हुआ यूपीपीसीएस में चयन 

आरक्षी से असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी तक: आशीष शुक्ला की सफलता बनी युवाओं के लिए प्रेरणा

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अमेठी। जनपद अमेठी के विकासखंड शुकुल बाजार क्षेत्र के ग्राम पूरे शुक्लन निवासी आशीष शुक्ला ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। आशीष शुक्ला, स्वर्गीय अशोक शुक्ला के पुत्र हैं, अरुण शुक्ला व विकास शुक्ला के भाई हैं जिनका चयन वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी (कॉन्स्टेबल) पद पर हुआ था। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा और लगातार प्रयास करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी के पद पर सफलता प्राप्त की।
 
आशीष शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। एक ओर जहां वे पुलिस विभाग में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने उच्च प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित किया। ड्यूटी के साथ-साथ पढ़ाई करना आसान नहीं होता, लेकिन आशीष ने समय का सदुपयोग करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया। उनकी इस सफलता के पीछे अनुशासन, निरंतरता और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।बताया जाता है कि आशीष शुक्ला शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं।
 
उनके पिता स्वर्गीय अशोक शुक्ला का सपना था कि उनका बेटा एक बड़े पद पर पहुंचे और समाज में नाम रोशन करे। आशीष ने अपनी इस उपलब्धि को अपने पिता की स्मृति को समर्पित किया है।आशीष शुक्ला की सफलता की खबर जैसे ही क्षेत्र में पहुंची, गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गांव में लोग उनके घर पहुंचकर मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर कर रहे हैं।
 
क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस उपलब्धि को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।आशीष शुक्ला ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, शिक्षकों और मित्रों को दिया है। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों में परिवार का सहयोग और शिक्षकों का मार्गदर्शन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
 
उन्होंने यह भी कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।उनकी इस उपलब्धि से यह साबित होता है कि यदि व्यक्ति में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो वह किसी भी परिस्थिति में सफलता प्राप्त कर सकता है। आशीष शुक्ला की यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। अमेठी जनपद के लिए यह एक गर्व का क्षण है, जब एक साधारण परिवार का बेटा अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उच्च प्रशासनिक सेवा में पहुंचा है। निश्चित रूप से आशीष शुक्ला की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और क्षेत्र का नाम रोशन करती रहेगी।

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