लापरवाही की भेंट चढ़ा एक और संविदा कर्मी, करंट लगने से दर्दनाक मौत

संविदाकर्मियों में आक्रोश, किया मुआवजा की मांग

अजित सिंह / राजेश तिवारी Picture
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  ब्यूरो रिपोर्ट 

सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश -

जनपद में विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही के चलते विद्युत दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला घोरावल क्षेत्र का है, जहाँ एक संविदा लाइनमैन की ड्यूटी के दौरान विद्युत स्पर्शआघात (करंट) की चपेट में आने से इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर विभाग की कार्यप्रणाली और संविदा कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घोरावल सब स्टेशन पर तैनात संविदा लाइनमैन संतोष (पुत्र चिंतामणि), निवासी घोरावल, गुरुवार की शाम लगभग 6:00 बजे एक खराब ट्रांसफार्मर की मरम्मत कर रहा था।

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बताया जा रहा है कि मरम्मत कार्य के दौरान अचानक विद्युत आपूर्ति (सप्लाई) चालू हो गई। बिजली का तेज झटका लगने से संतोष बुरी तरह झुलस गया और मौके पर ही अचेत हो गया। वहाँ मौजूद साथी कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए, संतोष ने रात्रि लगभग 1:00 बजे उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। सोनभद्र में संविदा कर्मियों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। स्थानीय लोगों और परिजनों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। इस घटना ने कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। 

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जब लाइनमैन खंभे या ट्रांसफार्मर पर काम कर रहा था, तो अचानक सप्लाई किसने और क्यों शुरू की?क्या शटडाउन लेने की प्रक्रिया का सही ढंग से पालन किया गया था? बिना सुरक्षा उपकरणों के संविदा कर्मियों को जोखिम भरे काम में क्यों झोंका जा रहा है? विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार और संविदा कर्मियों के शोषण की खबरें अक्सर आती रहती हैं। अल्प वेतन में काम करने वाले ये कर्मी न केवल शारीरिक जोखिम उठाते हैं, बल्कि उन पर अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों का अत्यधिक मानसिक दबाव भी रहता है।

विभागीय अधिकारी अक्सर ऐसी घटनाओं पर पर्दा डाल देते हैं। कभी-कभी तो विभाग अपने मृत कर्मचारी को पहचानने तक से इनकार कर देता है ताकि मुआवजा न देना पड़े। संतोष अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने अंधेरा छा गया है। सवाल यह है कि अब उस परिवार का भरण-पोषण कौन करेगा? क्या विभाग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और न्याय दिलाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद कब टूटेगी, इसका इंतजार पूरा जनपद कर रहा है। जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मासूम संविदा कर्मी यूं ही काल के गाल में समाते रहेंगे।

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