खोड़ारे थाना क्षेत्र अंतर्गत के चार मासूम रहस्यमय ढंग से लापता
पुलिस की सक्रियता से सकुशल बरामद
मनकापुर, गोण्डा। मनकापुर के खोड़ारे थाना क्षेत्र अंतर्गत ढढूवा कुतुबजोत के बड़का डीह गांव में सोमवार की शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब मंदिर के पास खेल रहे चार मासूम बच्चे अचानक रहस्यमय ढंग से लापता हो गए। परिजनों और ग्रामीणों की बेचैनी रात भर बनी रही, लेकिन मंगलवार दोपहर पुलिस और एसओजी टीम की मुस्तैदी से सभी बच्चे सकुशल बरामद कर लिए गए।
मंदिर के पास खेलते-खेलते गायब
सोमवार शाम लगभग 6 से 7 बजे के बीच विश्व प्रताप विश्वकर्मा (7 वर्ष), रितेश शर्मा (6 वर्ष), रीवानशु उर्फ शिव शांत (6 वर्ष) और कृष्णा उर्फ गोलू (10 वर्ष) गांव के मंदिर के पास खेल रहे थे। देर शाम तक घर न लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की, मगर बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। देखते ही देखते पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्राम प्रधान पेशकार ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी। सूचना मिलते ही खोड़ारे थानाध्यक्ष यशवंत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और खोज अभियान शुरू कराया। उच्चाधिकारियों को भी सूचित किया गया।
पुलिस व एसडीआरएफ की संयुक्त कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी तरबगंज यूपी सिंह तथा एसडीआरएफ टीम भी मौके पर पहुंची। गांव और आसपास के खेतों में रात भर तलाश जारी रही। मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे गांव के दक्षिण दिशा में लगभग 100 मीटर दूर सरसों के खेत में खोजबीन के दौरान पुलिस और एसओजी टीम को चारों बच्चे बैठे हुए मिले।बच्चों के सकुशल मिलने की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। मौके पर मौजूद लोगों ने खोड़ारे पुलिस और एसओजी टीम की तत्परता और सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की।
स्वास्थ्य परीक्षण के बाद परिजनों को सौंपे गएबरामद बच्चों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुक्कनपुर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और सभी को स्वस्थ पाया।इसके बाद विनीत जायसवाल (पुलिस अधीक्षक, गोण्डा) स्वयं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और बच्चों का हालचाल लिया। बाद में गौरा चौकी बाजार चौकी पर बच्चों को फल व चॉकलेट देकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक का बयान
पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने मीडिया को बताया कि खोड़ारे पुलिस और एसओजी टीम की सक्रियता से चारों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया है। पूछताछ में 10 वर्षीय कृष्णा उर्फ गोलू ने बताया कि खिलौना टूट जाने के डर से वे अपने साथियों के साथ छिप गए थे।
ग्रामीणों में संतोष, पर अभिभावकों के लिए सीख
घटना ने जहां कुछ घंटों के लिए पूरे गांव को चिंता में डाल दिया, वहीं पुलिस की तत्परता से सुखद अंत हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बच्चों की मनोवैज्ञानिक समझ और अभिभावकों की सतर्कता बेहद जरूरी है।यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि छोटी-सी बालसुलभ भूल कभी-कभी बड़े संकट का रूप ले सकती है। सौभाग्य से इस बार प्रशासन की मुस्तैदी और ग्रामीणों के सहयोग से चारों मासूम सुरक्षित घर लौट आए।

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