गोरखपुर में ईंट-भट्ठा सनचलको की मनमानी: बिना लाइसेंस, बिना नंबर प्लेट ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर दौड़ रही हैं, जनजीवन खतरे में

स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रतिदिन सुबह से देर रात तक लगभग 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां एक ही दिशा से जिले में प्रवेश करती हैं।

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ब्यूरो-शत्रुघ्नं त्रिपाठी
 
गोरखपुर।
 
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में ईंट-भट्ठा संचालकों की बेलगाम गतिविधियां अब आम जनता की जान के लिए खतरा बन चुकी हैं। जिले के विभिन्न इलाकों में सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना ड्राइविंग लाइसेंस, बिना रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट और किसी भी वैध कागजात के खुलेआम सड़कों पर दौड़ रही हैं। ये ट्रॉलियां भारी मात्रा में ईंटों से लदी रहती हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
 
स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रतिदिन सुबह से देर रात तक लगभग 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां एक ही दिशा से जिले में प्रवेश करती हैं। ग्रामीण और शहरी सड़कों पर ये भारी वाहन यातायात नियमों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए तेज रफ्तार से चलते हैं। ओवरलोडिंग, गलत साइड ड्राइविंग और बिना ब्रेक/लाइट की स्थिति में ये वाहन कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। लोग आरोप लगाते हैं कि पुलिस चौकियों पर इन अवैध वाहनों को रोका नहीं जाता, बल्कि 100 से 150 रुपये की मामूली रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ दिया जाता है। इससे ईंट-भट्ठा मालिकों का माफिया खुलेआम फल-फूल रहा है, जबकि आम जनता की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।
 
जिला पंचायत सदस्य पद (वार्ड संख्या 28, ब्लॉक पिपरौली) के प्रत्याशी कुलभूषण उर्फ दीपक पाण्डेय ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, "यह महज यातायात उल्लंघन नहीं, बल्कि जनता के जीवन के साथ खुला खिलवाड़ है। ईंट-भट्ठा मालिकों की इस अवैध गतिविधि पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।" उन्होंने नवनियुक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अपील की है कि पूर्व में एसपी सिटी रह चुके होने के नाते वे इस मामले में विशेष अभियान चलाएं। दीपक पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन पर होगी।
 
हाल के दिनों में जिले में अवैध खनन और ईंट-भट्ठों पर कुछ कार्रवाइयां हुई हैं, जैसे सहजनवा में चार अवैध भट्ठों पर छापेमारी और वाहनों की जब्ती, लेकिन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के लाइसेंस-रहित संचालन पर अभी भी प्रभावी अंकुश नहीं लगा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से चेकिंग अभियान चलाएं, ओवरलोडिंग पर जुर्माना लगाएं और रिश्वतखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
 
प्रश्न यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करेगा, या अब ही ईंट-भट्ठा माफिया पर लगाम कसकर जनता को राहत प्रदान करेगा? समय आ गया है कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि सड़कें सुरक्षित रहें और मासूमों की जान बचे।
 

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