9 महीने बाद भी विनियमितिकरण अधर में, सीजनल संग्रह अमीनों को नहीं मिला शासनादेश का लाभ
कानपुर।
हैरानी की बात यह है कि जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत को निस्तारित दिखा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ADM स्तर पर अटकी फाइलें
सीजनल संग्रह अमीनों का आरोप है कि विनियमितिकरण से जुड़ी सभी फाइलें ADM (वित्त एवं राजस्व) स्तर पर लंबित हैं। वहीं, मुख्य राजस्व लेखाकार कार्यालय द्वारा आवश्यक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा, जिससे पूरा मामला जानबूझकर लटकाया जा रहा है।
शासनादेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी शासनादेश और पूर्व डीएम के आदेशों के बाद भी अमीनों को लाभ न मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अमीनों का यह भी कहना है कि
👉 वर्तमान में मुख्य राजस्व लेखाकार कार्यालय एवं संबंधित अधिकारी विनियमितिकरण नहीं चाहते,
👉 इसी कारण वर्तमान जिलाधिकारी को गुमराह किया जा रहा है,
👉 जिससे शासनादेश के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही।
स्वतंत्र प्रभात सवाल करता है—
जब शासनादेश लागू है, तो विनियमितिकरण क्यों नहीं?
जब पूर्व में स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं, तो प्रशासन मौन क्यों है?
क्या अधिकारियों की मनमानी शासनादेश से ऊपर है?
सीजनल संग्रह अमीनों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेकर वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को उनका वैधानिक अधिकार दिलाएगा।

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