बंगलादेश में बेगुनाह हिन्दुओं के साथ बर्बरता कब तक? 

बांग्लादेश में अब अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ अमानवीय बर्बरता हिंसा और अत्याचार का सिलसिला थम नही रहा है

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मनोज कुमार अग्रवाल 
 
बांग्लादेश में अब अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ अमानवीय बर्बरता हिंसा और अत्याचार का सिलसिला थम नही रहा है। भारत में 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भारत की शांति के संदेशवाहक के रूप में भूमिका को विश्व के सामने रख रही थीं, तभी भारत के पड़ोसी देश बंगलादेश में एक निर्दोष हिन्दू जो गैराज में सो रहा था उसको पैट्रोल डाल कर जिंदा जलाने का मामला सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों अनुसार चंचल आग में फंसा रहा और काफी देर तक तड़पता रहा। वह मदद के लिए चीख रहा था, लेकिन बाहर से शटर लॉक था। उसे निकलने का रास्ता नहीं मिला।
 
लोकल लोगों की सूचना पर फायर सर्विस पहुंची और आग बुझाने में करीब एक घंटा लगा, लेकिन चंचल पूरी तरह जल चुका था, मौके पर ही उसकी मौत हो गई। लोगों ने घटना को दिल दहला देने वाला बताया। स्थानीय दुकानदार राजीब सरकार ने सी.सी.टी.वी. कैमरे की फुटेज का हवाला देकर कहा कि यह हादसा नहीं था। कैमरे में दिखा कि कई लोग जानबूझकर शटर को आग लगा रहे हैं। लगभग 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बंगलादेश में 2024 के तख्तपलट के बाद से हालात अस्थिर बने हुए हैं। इस्लामी संगठनों की सक्रियता बढ़ने से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। बंगलादेश में हिंदू और सूफी मुस्लिम सहित अल्पसंख्यकों की आबादी 10 प्रतिशत से भी कम है। भारत ने बंगलादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता जताई है।
 
उपरोक्त घटना बंगलादेश के नरसिंदी जिले की है। 23 वर्षीय चंचल के परिवार का कहना है कि यह एक सोची समझी हत्या है। बंगलादेश में 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना सरकार को गिराए जाने से जुड़ी डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग अमरीका से लीक होने के बाद नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। रिकॉर्डिंग लीक होने के बाद अवामी लीग ने अमरीका की भूमिका को लेकर सवाल उठाया है। बंगलादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने हाल ही में एक इवेंट में कहा कि यह ऑडियो अवामी लीग की लंबे समय से चली आ रही बात को सही साबित करता है कि शेख हसीना सरकार का गिरना पूरी तरह से एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया नहीं थी। बीते कुछ वर्षों में बंगलादेश हो या फिर नेपाल, सरकार गिरने की घटना सामने आई।
 
अब बंगलादेश को लेकर लीक हुई यू.एस. डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग ने वाशिंगटन को नए आरोपों के केंद्र में ला दिया है। एक बड़े डेली, स्ट्रैटन्यूज ग्लोबल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस रिकॉर्डिंग का जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक इस रिकॉर्डिंग में एक सीनियर अमरीकी डिप्लोमैट की बातचीत है, जिसमें वह बंगलादेश की इस्लामी राजनीतिक ताकतों से जुड़ने और हसीना के बाद के दौर में देश की चाल का अंदाजा लगाने के बारे में बात कर रहे हैं। इससे बंगलादेश में अमरीका की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है।शेख हसीना की सरकार के गिरने से लेकर आज तक बंगलादेश में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। यूनस सरकार अमेरिका की कठपुतली सरकार ही है। कट्टरपंथी सरकार पर हावी है। हिन्दुओं पर अत्याचार जारी है। आर्थिक स्थिति भी दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
 
बंगलादेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डालने वाले एक बड़े फैसले में बंगलादेश टैक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (बी.टी.एम.ए.) ने देशभर की सभी टैक्सटाइल मिलों को 1 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान किया है। एसोसिएशन ने इसके पीछे भारी वित्तीय नुकसान और घरेलू यार्न उत्पादकों को बचाने में अंतरिम सरकार की कथित उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। करीब 23 अरब डॉलर मूल्य वाला बंगलादेश का टैक्सटाइल उद्योग देश के गारमेंट सैक्टर की रीढ़ है, जो कुल निर्यात आय का 85 प्रतिशत हिस्सा देता है। चुनाव से पहले मिल बंदी की धमकी से सप्लाई चेन टूटने, मजदूरी भुगतान में देरी और व्यापक आर्थिक संकट की आशंका बढ़ गई है।
 
नए बंद से लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। बी.टी.एम.ए. के अनुसार पिछले 30 दिनों से स्पिनिंग मिलें केवल 50 प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं। इस अवधि में उद्योग को 12,000 से 15,000 करोड़ टका का नुकसान हुआ है। जिससे बैंक ऋण चुकाने में असमर्थता बढ़ गई है और देश की वित्तीय प्रणाली पर खतरा मंडरा रहा है। रसेल ने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में उत्पादन जारी रखना असंभव है। उन्होंने कहा कि यदि इस संकट के कारण बैंकिंग सैक्टर में अस्थिरता पैदा होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। बी.टी.एम.ए. अध्यक्ष ने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मैं सभी मंत्रालयों और संबंधित विभागों के चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन हर कोई जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल रहा है। कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्सटाइल क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में करीब 13 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन सरकार इस सैक्टर की समस्याएं सुनने के लिए 13 मिनट भी नहीं निकाल पा रहा है।
 
बंगलादेश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण वहां की सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव ही पड़ रहा है। कट्टरपंथियों के हावी होने से वहां के अल्पसंख्यक समुदाय विशेषतया हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर भीड़ द्वारा किए गए हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं, जो भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की है। 18 दिसंबर को एक कपड़ा कारखाने में काम करने वाले दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोपों पर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और बाद में आग लगा दी। कुछ दिनों बाद अमृत मंडल को राजबारी जिले में जबरन वसूली के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था।
 
इन घटनाओं के बावजूद हिंसा जारी है। पिछले सप्ताह, कालीगंज में भीड़ के हमले में हिंदू व्यापारी लिटन चंद्र दास की हत्या कर दी गई। एक अन्य मामले में पेट्रोल पंप पर बिना भुगतान किए भाग रहे वाहन को रोकने की कोशिश में पेट्रोल पंप कर्मचारी रिपन साहा को कुचलकर मार डाला गया।बंगलादेश के आंतरिक हालातों को देखते हुए भारत को अति सतर्क होने की आवश्यकता है। फरवरी में होने वाले चुनावों के बाद स्थिति में सकारात्मक बदलाव आने की आशा है। लेकिन अगर उसके बाद भी स्थिति नहीं बदलती तो भारत को वहां के हिन्दू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठा समस्या का समाधान ढूंढना होगा। बंगलादेश के हिन्दुओं को कट्टरपंथियों के हाथों मरने के लिए  नहीं छोड़ा जा सकता।विश्व समुदाय खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी इस नस्ली हिंसा पर चुप्पी साधे हुए हैं यह बेहद हैरत की बात है। 

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