राजनीति
क्षेत्र के विकास के लिए समाज सेवक एस के चौबे ने लगाई दिल्ली उच्च न्यायालय से गुहार
नई दिल्ली। पटेल नगर कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता पहले एक तो दिल से उछाल कर देखना होगा।एक तरफ जहां जनता का विश्वास आज के नेताओं पर से उठता जा रहा है वही जनहित में काम कर रहे समाज सेवक से जनता का करीबीपन बढ़ता जा रहा है।मै बात करूं तो विधान सभा पटेल नगर में विगत 20 वर्षों से समाजहित में काम करने वाले समाज सेवक एस के चौबे जो किसी पहचान के मोहताज नहीं है के कार्यों को देखते हुए जनता का झुकाव चुने हुए प्रतिनिधियों से ज्यादा इस समय एस के चौबे की तरफ होता देखा जा रहा है।
अपने काम करने के तरीके से क्षेत्र और आस पास के विधान सभाओं में पहचान बनाने वाले समाज सेवक एस के चौबे नेताओं के ऊपर भरोसा न करते हुए विभागों के ऊपर दबाव बनाते है और जब विभाग उनकी बात नहीं सुनते है तब वे माननीय न्यायालय की तरफ कूंच करते है और न्यायालय के आदेश से क्षेत्र के काम करवाते है।
जैसे कि राजनीतिक दलों के मुख्य चुनावी मुद्दा प्रेम नगर फाटक का फुट ओवर ब्रिज जो कि माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से बनवा कर अपना नाम अमर कर गए, इसी तर्ज पर उन्होंने एक और गंभीर समस्या के निदान के लिए जनहित याचिका के माध्यम से माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे है।
समस्या यह है कि विधानसभा पटेल नगर के प्रेम नगर, नेहरू नगर बलजीत नगर में सीवर लगभग 30 वर्ष पुराना होने के कारण बैठ चुके है जिसके कारण सीवर का पानी ऊपर सड़कों पर तैर रहा होता है, वही हाल गलियों का भी है। सीवर से सट कर आने वाली पीने के पानी की पाईप लाईन भी खराब और फट गई है जिसके कारण सीवर का पानी पाईप लाईन के माध्यम से लोगों के घरों में जा रहा है।
एस के चौबे द्वारा जब जल बोर्ड के अधिकारियों से इस समस्या के निदान मतलब पुनः नया सीवर लाईन डालने और पीने के पानी की नई पाईप लाईन डालने के लिए बात किया तो अधिकारी फंड ना होने की बात करके पल्ला झाड़ दिए लेकिन चौबे जी कहां मानने वाले थे वे तुरंत माननीय न्यायालय की तरफ कूंच कर गए और जनहित के माध्यम से माननीय न्यायालय के समक्ष अपनी समस्या को रखने के लिए एक बार फिर कमर कस लिए है जिसमें क्षेत्र की जनता भी खुश है और चौबे जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी भी है।
एस के चौबे के साथ कानूनविदों की एक बड़ी टीम भी है जो समाजहित के लिए उनके साथ लगी हुई है।ऐसे समाज सेवकों के साथ जनता और क्षेत्रीय मीडिया भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है।एस के चौबे सभी राजनीतिक दलों के लिए एक चुनौती बनते जा रहे है वह भी मात्र अपने सेवा भाव के बगले।

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